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राकेश टिकैत के साथ किसने की 'हाथापाई'? जिसके बाद भारतीय किसान यूनियन ने पंचायत बुलाई; पगड़ी पहनाई

Kisan Panchayat: पहलगाम घटना के विरोध में आक्रोश रैली के दौरान राकेश टिकैत के साथ ‘हाथापाई' के बाद भाकियू ने पंचायत बुलाई। रैली में टिकैत के पहुंचने पर भीड़ का एक हिस्सा उत्तेजित हो गया, जिसके कारण टिकैत वहां से चले गए। जब वह जा रहे थे तभी उनसे हाथापाई हुई और उनकी पगड़ी जमीन पर गिर गई।

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मुजफ्फरनगर पंचायत में राकेश टिकैत को पगड़ी पहनाई गई।

Scuffle with Rakesh Tikait: पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के विरोध में शुक्रवार को मुजफ्फरनगर में निकाली गई आक्रोश रैली के दौरान किसान नेता राकेश टिकैत के साथ 'हाथापाई' की घटना के बाद भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने शनिवार को पंचायत बुलाई है। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने ऐलान किया कि घटना पर चर्चा के लिए मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में पंचायत आयोजित की जा रही है।

मुजफ्फरनगर पंचायत में राकेश टिकैत को पहनाई गई पगड़ी

GIC मैदान में भाकियू की महापंचायत, समाजवादी पार्टी ने भाकियू महापंचायत को पूर्ण समर्थन दिया। समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र मलिक, विधायक अतुल प्रधान, सपा जिला अध्यक्ष, सहित सपा के नेता महापंचायत में पहुंचे। राकेश टिकैत के विरोध के बाद महापंचायत बुलाई गई है। मुजफ्फरनगर पंचायत में राकेश टिकैत को पगड़ी पहनाई गई। मुजफ्फरनगर के GIC मैदान में पंचायत स्थल से पैदल मार्च शुरू हुआ, टाउन हॉल के मैदान में भीड़ पहुंचेगी। मंच पर राकेश टिकैत की तबीयत भी बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

किसान आंदोलन को कमजोर करने का लगाया आरोप

नरेश टिकैत ने आरोप लगाया कि आक्रोश रैली में हुई घटना किसान आंदोलन को कमजोर करने के लिए एक राजनीतिक दल द्वारा रची गई साजिश का हिस्सा थी। घटना के बाद मुजफ्फरनगर पुलिस ने भाकियू के जिला अध्यक्ष नवीन राठी की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है। पहलगाम आतंकवादी हमले के विरोध में शुक्रवार को यहां विभिन्न व्यापारी संगठनों और हिंदू कार्यकर्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से एक आक्रोश रैली निकाली गई और विरोध-प्रदर्शन किया गया।

राकेश टिकैत के शामिल होने पर कुछ लोगों ने किया विरोध

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी शाम को विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। हालांकि, उनकी उपस्थिति को लेकर कुछ लोगों ने विरोध किया और उन्हें सभा को संबोधित करने से रोक दिया। रैली में टिकैत के पहुंचने पर भीड़ का एक हिस्सा उत्तेजित हो गया, जिसके कारण टिकैत वहां से चले गए। जब वह जा रहे थे तभी उनसे हाथापाई हुई और उनकी पगड़ी जमीन पर गिर गई।

इस घटना की निंदा करते हुए नरेश टिकैत ने कहा, 'यह घटना अचानक नहीं हुई। यह सोची समझी साजिश थी और यह राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित थी।' उन्होंने कहा कि अपराह्न में शुरू होने वाली पंचायत से पहले पूरे क्षेत्र से किसान सिसौली और मुजफ्फरनगर में इकट्ठा होने लगे हैं।

राकेश टिकैत ने इसे राजनीतिक दल की साजिश करार दी

शुक्रवार को राकेश टिकैत ने घटना की निंदा करते हुए इसे 'किसान आंदोलन को दबाने के लिए एक विशेष राजनीतिक दल की साजिश' बताया था। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ कुछ युवकों को भेजा गया था और उन्हें परेशान करने वाले लोगों मे से कुछ शराब के नशे में थे। इसी से जुड़े एक घटनाक्रम में टिकैत ने घोषणा की कि भाकियू पहलगाम में हाल में हुए आतंकवादी हमले के विरोध में ट्रैक्टर मार्च का आयोजन करेगी। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे।

इस बीच, पुलिस अधीक्षक (नगर) सत्यनारायण प्रजापत ने कहा, 'हमने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है और राकेश टिकैत के साथ हाथापाई में शामिल असामाजिक तत्वों की पहचान करने के लिए जांच शुरू कर दी है।' पुलिस ने पूछताछ के लिए कृष्णापुरी इलाके के निवासी सौरभ वर्मा को हिरासत में लिया है। अधिकारी अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। शहर में भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, खासकर जीआईसी मैदान पर जहां पंचायत होनी है।

जिला मजिस्ट्रेट उमेश मिश्रा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए मैदान का दौरा किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने घटना की निंदा की और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना से विधायक एवं रालोद के विधायक दल के नेता राजपाल बालियान ने शुक्रवार देर रात टिकैत से मुलाकात की। उन्होंने इस घटना को ‘दंगाई कृत्य’ बताया और जिला प्रशासन से त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया।

बालियान ने मीडिया से कहा, 'इस घटना के लिए जिम्मेदारों को दंडित किया जाना चाहिए। लोकतांत्रिक समाज में इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है।' राकेश टिकैत के बड़े भाई नरेश टिकैत बालियान खाप के चौधरी हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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