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जेल से कैसे सरकार चला रहे हैं अरविंद केजरीवाल? BJP ने AAP से पूछे 10 तीखे सवाल

AAP vs BJP: भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर तीखा प्रहार करते हुए ये पूछा है कि सत्तारूढ़ आप बताए कि अरविंद केजरीवाल जेल से कैसे सरकार चला रहे हैं? बीते सात साल से CAG की 11 रिपोर्टों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? आम आदमी पार्टी बताए कि, छठे वित्त आयोग का अब तक गठन क्यों नहीं किया गया?

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केजरीवाल से भाजपा ने पूछ लिए तीखे सवाल।

Delhi Politics: दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को बर्खास्त करने की मांग कर रहे भाजपा विधायकों ने बुधवार को सत्तारूढ़ पार्टी से पूछा कि वह बताए कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल से सरकार कैसे चला रहे हैं और पिछले पांच महीनों में उनके द्वारा लिए गए निर्णयों की सूची भी पेश करे। विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने आप से 10 सवाल पूछे और मांग की कि वह मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा जेल से लिए गए फैसलों की सूची पेश करे। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से 10 सवाल.... जिनके जवाब हर दिल्लीवासी चाहता है।

सवाल संख्या 1

केजरीवाल पांच महीने से जेल में हैं पूरी आम आदमी पार्टी बताए कि, आखिर वो जेल में किस तरह सरकार चला रहे हैं? अब तक उन्होंने कितने फैसले लिए हैं?

सवाल संख्या 2

आम आदमी पार्टी बताए कि, छठे वित्त आयोग का अब तक गठन क्यों नहीं किया गया?

सवाल संख्या 3

बीते सात साल से CAG की 11 रिपोर्टों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

सवाल संख्या 4

चीफ सेक्रेटरी द्वारा विधानसभा के पटल पर पेश रिपोर्ट आखिर आतिशी जी छुपा कर क्यों बैठी हुई हैं? केजरीवाल सरकार बताए आखिर 73,000 करोड़ का दिल्ली जल बोर्ड का बिल कब चुकता करेगी?

सवाल संख्या 5

केंद्र की आयुष्मान योजना आखिर दिल्ली में अब तक लागू क्यों नहीं हुई?

सवाल संख्या 6

केंद्र सरकार की योजना PM-ABHIM के जरिए दिल्ली सरकार को मिले 2,406 रुपए आखिर क्यों नहीं खर्च कर रही केजरीवाल सरकार?

सवाल संख्या 7

केजरीवाल सरकार उनके अंतर्गत आने वाले कालेज को क्यों नहीं दे रही फंड?

सवाल संख्या 8

दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेनरशिप में जो घोटाला हुआ है उसे उजागर करे केजरीवाल एंड कंपनी

सवाल संख्या 9

दिल्ली में बनने वाले 7 ICU अस्पतालों की लागत क्यों बढ़ी और अब तक इनका निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हो पाया?

सवाल संख्या 10

जहां झुग्गी वहां मकान कहने वाले केजरीवाल बताएं कितनी झुग्गियों के बदले बनवाया पक्का मकान? कितनी झुग्गियों में नल से दिया जल?

सरकार गिराने की साजिश का लगाया था आरोप

आम आदमी पार्टी (आप) की वरिष्ठ नेता और मंत्री आतिशी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाकर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार को ‘‘पिछले दरवाजे’’ से गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया। यह आरोप ऐसे समय लगाया गया, जब एक दिन पहले ही राष्ट्रपति सचिवालय ने विपक्षी दल भाजपा के एक ज्ञापन को गृह मंत्रालय के पास ‘‘समुचित ध्यान देने’’ के लिए भेजा था। ज्ञापन में कहा गया है कि दिल्ली संवैधानिक संकट का सामना कर रही है।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यदि आप 10 सवालों का जवाब देने में विफल रहती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सत्तारूढ़ पार्टी के पास ‘‘संवैधानिक संकट’’ और ‘‘संविधान के उल्लंघन’’ का कोई जवाब नहीं है और उसकी (आप की) सरकार 'दोषी' है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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