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BJP या कांग्रेस, मायावती के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले से किसे होगा फायदा?

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Jan 16, 2024, 01:50 PM IST

Mayawati: अपने जन्मदिन पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव खत्म होने के बाद गठबंधन के बारे में विचार कर सकती है।

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मायावती

Photo : PTI

Mayawati Decision on Election 2024: बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को आगामी 2024 लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया। मायावती ने कहा कि वह दलितों, पिछड़े वर्गों, आदिवासियों और अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण के लिए बसपा को मजबूत करना चाहती हैं। मायावती ने सीधे तौर पर भाजपा का नाम लिए बिना समाजवादी पार्टी पर मुख्य रूप से निशाना साधा। हालांकि, उन्होंने बढ़ती गरीबी और बेरोजगारी के बीच मुफ्त राशन के वितरण पर अपनी बात रखी।

मायावती का अकेले लड़ने का ऐलान

अपने जन्मदिन पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव खत्म होने के बाद गठबंधन के बारे में विचार कर सकती है। मायावती ने कहा, गठबंधन को लेकर हमारा अनुभव हमारे लिए कभी फायदेमंद नहीं रहा है और गठबंधन से हमें ज्यादा नुकसान होता है। इसी वजह से देश की ज्यादातर पार्टियां बसपा के साथ गठबंधन करना चाहती हैं। चुनाव के बाद गठबंधन पर विचार किया जा सकता है। चुनाव के बाद बसपा अपना समर्थन दे सकती है। अभी हमारी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी।

गठबंधन से दूरी क्यों?

मायावती ने जाति-आधारित राजनीति के बने रहने का हवाला देते हुए कहा कि उनके मतदाता, खासकर ऊंची जातियां, बसपा का समर्थन नहीं करती हैं। सपा और कांग्रेस के साथ पिछले गठबंधनों का जिक्र करते हुए उन्होंने गिरगिट की तरह रंग बदलने के लिए अखिलेश यादव को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि गठबंधन से हमेशा बसपा को नुकसान होता है, इसलिए उन्होंने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया।

गठबंधन पर क्या असर

सियासी नजरिए से यूपी में जाति का गणित समझना अहम है। यूपी में महत्वपूर्ण ओबीसी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए नरेंद्र मोदी फैक्टर 2024 के चुनावों के नतीजे तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अहम बात यह है कि भाजपा मुस्लिम महिलाओं सहित सभी समुदायों से समर्थन का दावा कर रही है। हालांकि, मायावती के इस कदम से दलित और मुस्लिम वोट बंटने के आसार हैं। यूपी में 45% से अधिक ओबीसी मतदाता, लगभग 20-21% दलित और 15-16% मुस्लिम वोटर हैं। मायावती की राजनीति मुख्य रूप से इनके आसपास ही घूमती है। अकेले चुनाव लड़ने का उनका फैसला इन वोटों में बिखराव कर सकता है।

फैसला बीजेपी के लिए वरदान?

मायावती का कदम भाजपा को फायदा पहुंचा सकता है। उनके कदम से भाजपा विरोधी वोट सपा और बसपा के बीच बंट जाएंगे। हालांकि, पीएम मोदी की कल्याणकारी योजनाओं से उत्साहित बीजेपी का मानना है कि वह सभी समुदायों के वोट आकर्षित कर सकती है।

कांग्रेस की अपील और संभावित परिदृश्य

पहले कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस, बसपा के साथ गठबंधन करने में दिलचस्पी ले रही है, लेकिन अब उसकी रणनीति बिगड़ती दिख रही है। कांग्रेस ने मायावती से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। कांग्रेस 2019 के 37.8% वोट शेयर के खिलाफ एकजुट विपक्ष की मुहिम में लगी हुई है, जिसका लक्ष्य संयुक्त रूप से 62.2% वोट शेयर हासिल करने का है। इसके लिए यूपी एक अहम राज्य है जिसके बिना इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल है। लेकिन यूपी में ये रणनीति कामयाब हो सके, इसका दारोमदार बहुत कुछ मायावती पर भी है।

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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