Space Force: राज्यसभा में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के सदस्य सुजीत कुमार ने अंतरिक्ष में भारत के रणनीतिक हितों की सुरक्षा के लिए स्वतंत्र अंतरिक्ष बल (Space Force) के गठन की सिफारिश की। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कुमार ने कहा कि अंतरिक्ष अब केवल वैज्ञानिक क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि यह एक रणनीतिक डोमेन बन गया है। उन्होंने कहा कि आज सभी संचार, नौवहन, बैंकिंग प्रणाली, निगरानी और सैन्य संचालन अंतरिक्ष आधारित संसाधनों पर निर्भर हैं। कुमार ने कहा कि सरकार ने रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी और रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का गठन किया है। उन्होंने इसरो की उपलब्धियों और ऐतिहासिक उपग्रह रोधी मिसाइल परीक्षण (ASAT) की सफलता का हवाला देते हुए कहा कि इससे भारत एक विश्वसनीय अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित हुआ है।
स्वतंत्र स्पेस फोर्स आज की जरूरत
भाजपा सदस्य ने कहा, इन सभी उपलब्धियों के साथ ही स्वतंत्र स्पेस फोर्स यानी अंतरिक्ष बल आज एक रणनीतिक आवश्यकता भी है। हमारे बड़े रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी चीन के पास विशिष्ट रणनीतिक समर्थन बल है, जबकि अमेरिका ने 2019 में अपना अंतरिक्ष बल स्थापित किया था। उन्होंने चेतावनी दी कि अन्य देश अंतरिक्ष क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं और भारत इसमें ढिलाई बर्दाश्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, वर्तमान रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी अभी अंतरिम स्वरूप में है, यह त्रि-सेवा संरचना के अंतर्गत कार्य करती है, और इसके पास अंतरिक्ष अभियानों को लेकर स्वतंत्र कर्मी, स्थायी घोषणापत्र प्राधिकार आदि नहीं हैं।
कुमार ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष पर निर्भरता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि तीसरे चरण की निगरानी प्रणालियों और दर्जनों सैन्य उपग्रहों के साथ, अंतरिक्ष संसाधनों की सुरक्षा के लिए जल्द ही निरंतर विशिष्ट सैन्य संचालन की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष युद्ध अलग प्रकृति का है और इसके लिए विशेष नियम एवं सिद्धांत, समर्पित अधिकारी, स्थिति को लेकर सतत जागरूकता और उद्योग के सहयोग की जरूरत होगी।
कुमार ने सरकार से अपील की कि वह एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करे, जो स्वतंत्र अंतरिक्ष बल और अंतरिक्ष युद्ध अकादमी की संभावनाओं का अध्ययन कर जल्द से जल्द सिफारिशें प्रस्तुत करे। शून्यकाल में ही द्रमुक के तिरुचि शिवा ने श्रम कानूनों का मुद्दा उठाया, वहीं भाजपा के अमर पाल मौर्य ने कहा कि सांसदों और विधायकों के लिए क्षेत्रों में स्थायी कार्यालय की व्यवस्था की जानी चाहिए।
