Himachal Govt Pay Scale decision revised: कांग्रेस सरकार ने पूर्व भाजपा सरकार के समय दिए गए उच्च वेतनमान का निर्णय वापस ले लिया गया है। छह सितंबर, 2022 को जारी अधिसूचना के अनुसार, 89 श्रेणियों के विभिन्न कर्मचारियों जो तीन जनवरी 2022 से पूर्व नियुक्त हुए थे, इन्हें दो वर्ष का नियमित कार्यकाल पूर्ण करने पर उच्च वेतनमान दिया गया था। अब जहां इस फैसले को खत्म कर दिया है, जिसको लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार की देनदारियां इतनी हैं कि सरकार की रेलगाड़ी हांफने लगी है। पहले बिना सोचे समझे OPS लागू किया फिर उसमें भी कॉन्ट्रैक्ट कर्मी कोर्ट गए तो उस निर्णय को संशोधित किया। ऐसा प्रतीत होता है कि जो वादे कांग्रेस ने सत्ता में आने के लिए किए वे सब बिना गुणा भाग के थे और अब हिमाचल प्रदेश को मंझधार में फंसा कर रख दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि अब हिमाचल के सभी वर्ग ठगे से महसूस कर रहे हैं जिसमें से कर्मचारी वर्ग तो बहुत ही ठगा गया है।
यह पूरी तरह असहनीय- राणा
अजय राणा ने कहा अब 3 जनवरी 2022 से सिविल सर्विस के कर्मियों का हायर ग्रेड खत्म करने की घोषणा 6 सितम्बर के पत्र से कर दी, जो कि पूरी तरह असहनीय है। यह कर्मचारियों को निराश करता है। कर्मचारी तो इसका विरोध करेंगे ही पर इसके दूरगामी परिणाम भी दिखाई देंगे। कौन कर्मचारी है जो अपना पेट काट कर काम करना चाहेगा। सरकार के लोगों को लगता है जैसे इनकी ये चालाकियां किसी को समझ ही नही आ रही हैं। अपने मित्रों के लिए तो गाडियां व पद परोसे जा रहें हैं, ये पब्लिक है सुक्खू जी सब जानती है।
कर्मचारी विरोधी चेहरा
राणा ने कहा कि आप क्या कह कर आए थे और क्या कर रहे हैं ? आप हिमाचल की स्थिति खराब कर रहे हैं। कौन सलाहकार है आपका जो आपसे यह करवा रहा है। हम हैरान है कि 180 डिग्री पर आदमी महज सत्ता के लिए कैसे इतना झूठ बोल लेता होगा? उन्होंने कहा इससे हिमाचल में बहुत ही भयंकर परिणाम आएंगे। क्या आपने यह सोचा कि कर्मी अपना घाटा पूरा करने के लिए क्या कर सकता है? भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा कर्मचारियों को उच्च वेतनमान देने का निर्णय वापस लेना वर्तमान सरकार का कर्मचारी विरोधी चेहरा उजागर करता है।
कितना होगा नुकसान?
वित्त विभाग ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर इस लाभ को समाप्त करने का निर्णय लिया है। विभागों को निर्देश दिया गया है कि इन कर्मचारियों का पुनः वेतन निर्धारित किया जाए। इसके परिणामस्वरूप प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिमाह 10,000 से 15,000 रुपये का वित्तीय नुकसान होगा।
