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पीएम मोदी को हराने के लिए राहुल गांधी ने लिया 'भारत विरोधी ताकतों' का सहारा; BJP के इस सनसनीखेज आरोप के बाद भड़की कांग्रेस

BJP vs Congress: यूएसएआईडी फंडिंग को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। इस बीच भाजपा नेता ने राहुल गांधी पर पीएम मोदी को हराने के लिए 'भारत विरोधी ताकतों' का सहारा लेने का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस ने ये मांग की है कि ‘यूएसएड' के मामले में भाजपा माफी मांगे, 70 साल की विदेशी ‘फंडिंग' पर ‘श्वेत पत्र' लाया जाए। आपको पूरा विवाद समझाते हैं।

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राहुल गांधी पर बीजेपी ने लगाया गंभीर इल्जाम।

USAID Funding Allegations: भारतीय जनता पार्टी के नेता गौरव भाटिया ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सनसनीखेज आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि राहुल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के प्रयास में 'भारत विरोधी ताकतों' का सहारा लेने का आरोप लगाया। भाजपा नेता ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया आरोप का हवाला दिया कि अमेरिकी सहायता राशि का इस्तेमाल भारत की चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के लिए किया जा रहा है।

'हमारे देश के लोकतंत्र को नष्ट करना चाहते हैं राहुल गांधी'

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए भाटिया ने कहा कि विपक्ष के नेता हमारे देश के लोकतंत्र को नष्ट करना चाहते हैं, क्योंकि वह पीएम मोदी को 'बर्दाश्त' नहीं कर सकते। उन्होंने आगे कहा, 'यह चिंताजनक है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी, जिन्होंने हमारे देश की अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने के लिए भारत के संविधान के तहत शपथ ली है, भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं और भारत विरोधी ताकतों को हमारे देश की शुद्ध चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वह (राहुल गांधी) पीएम मोदी को हराने के लिए विदेशी ताकतों का सहारा ले रहे हैं।'

भाटिया ने कहा, 'वे न केवल प्रधानमंत्री मोदी के पीछे पड़े हैं, बल्कि हमारे देश के लोकतंत्र को नष्ट करना चाहते हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज वैश्विक नेता बन गया है और वे इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते और न ही पचा सकते हैं।' भाटिया का यह बयान डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत में मतदान के लिए अमेरिकी सरकार द्वारा 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आवंटन पर सवाल उठाए जाने के बाद आया है। उन्होंने इसे 'रिश्वत योजना' बताया है।

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भाजपा नेता गौरव भाटिया का राहुल गांधी पर सनसनीखेज आरोप।

गांधी और जॉर्ज सोरोस के बीच संबंध स्थापित करते हुए भाटिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता भारत का ठेका उन्हें देना चाहते हैं। भाटिया ने कहा कि 'भले ही राहुल गांधी ने संविधान की शपथ ली हो, लेकिन उनके मन में भारत और उसके लोकतंत्र को कमजोर करने का फैसला है। दूसरा नाम जो सामने आ रहा है, वह जॉर्ज सोरोस है। अगर मैं गांधी और सोरोस कहूं तो - गोंडोस। भारत में हर कोई यही कह रहा है। वे भारत का ठेका सोरोस को देना चाहते हैं। जो कोई भी भारत से नफरत करता है, राहुल गांधी उससे प्यार करते हैं।'

कांग्रेस ने यूएसएआईडी को लेकर स्मृति ईरोनी को लपेटा

भाजपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उन्हें स्मृति ईरानी के यूएसएआईडी की ब्रांड एंबेसडर होने की याद दिलाई। उन्होंने सवाल किया कि क्या यूएसएआईडी उनके विरोध के पीछे है। खेड़ा ने कहा, 'चुनिंदा तरीके से वे कह रहे हैं कि कांग्रेस सरकार ने विदेशी फंडिंग एजेंसियों से पैसा लिया। जब स्मृति ईरानी यूएसएआईडी की ब्रांड एंबेसडर थीं और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करती थीं, तो क्या यूएसएआईडी उन विरोध प्रदर्शनों के पीछे था? सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद हमारी सरकार चुनाव हार गई और फिर वे अमेरिका गए और वहां रोड शो किए। हर कोई जानता है कि उन्हें फोर्ड फाउंडेशन से पैसा मिलता था और इसमें आरएसएस भी शामिल था।'

कांग्रेस की मांग- ‘यूएसएड' के मामले में भाजपा माफी मांगे

कांग्रेस ने अमेरिकी एजेंसी ‘यूएसएड’ के वित्तपोषण के मामले से जुड़ी एक खबर का हवाला देते हुए शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि अब सच सामने आने के बाद सत्तारूढ़ दल को माफी मांगनी चाहिए। मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि ‘यूएसएड’ तथा अन्य ऐसी विदेशी एजेंसियों द्वारा पिछले 70 वर्षों के दौरान भारत में की गई ‘फंडिंग’ पर श्वेत पत्र लाया जाना चाहिए।

आखिर क्या है विदेशी फंडिंग से जुड़ा पूरा विवाद?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘यूएसएड’ द्वारा भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए किए गए 2.1 करोड़ डॉलर के वित्तपोषण को लेकर सवाल उठाया था और कहा था कि उन्हें लगता है कि पूर्व का अमेरिकी प्रशासन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव किसी और को जितवाना चाहता था। अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में शुक्रवार को प्रकाशित एक खबर में कहा गया कि यह 2.1 करोड़ डॉलर भारत में नहीं, बल्कि बांग्लादेश में भेजा गया था।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर यह खबर साझा करते हुए पोस्ट किया, 'झूठ सबसे पहले वाशिंगटन में बोला गया। फिर झूठ को भाजपा की झूठ सेना द्वारा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया...अब झूठ का पूरी तरह से पर्दाफाश हो गया है।' उन्होंने सवाल किया कि क्या झूठे लोग माफी मांगेंगे?

कांग्रेस ने पूछा- क्या 2014 में भाजपा इसी पैसे से जीती थी?

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, 'एक हफ्ते से एक कहानी चलाई रही है कि यूएसएड ने नरेंद्र मोदी सरकार को अस्थिर करने के लिए 2.1 करोड़ डॉलर दिए। अगर इतनी सुरक्षा एजेंसियों के होते हुए भी मोदी सरकार ने भारत में 2.1 करोड़ डॉलर आने दिए तो ये शर्म की बात है। वहीं, जब इस बारे में मोदी सरकार से सवाल पूछा गया तो कहने लगे- ये पैसा 2012 में संप्रग सरकार के समय आया था। ऐसे में क्या 2014 में भाजपा इसी पैसे से जीती थी?' उन्होंने एक अंग्रेजी दैनिक की खबर का हवाला देते हुए कहा कि सच्चाई ये है कि यूएसएड के ये 2.1 करोड़ डॉलर बांग्लादेश के गैर सरकारी संगठनों को गए हैं।

खेड़ा ने दावा किया, 'एक समय भारत के प्रधानमंत्री के पद की ऐसी साख होती थी कि अमेरिका तक को पीछे हटना पड़ता था, लेकिन आज अमेरिका से बांग्लादेश में 2.1 करोड़ डॉलर आ गए, पर नरेंद्र मोदी को कुछ पता ही नहीं।' उन्होंने सवाल किया, 'ये आपका कैसा सूचना तंत्र है? ये आपका कैसा खुफिया तंत्र है? क्या बांग्लादेश में आई अस्थिरता का असर भारत पर नहीं पड़ेगा?' कांग्रेस नेता ने कहा, 'हम यूएसएड या किसी फंडिंग एजेंसी के खिलाफ नहीं हैं। देश में फंडिंग के लिए कानून हैं, जिनके तहत भाजपा से जुड़े एनजीओ भी फंड लेते हैं, लेकिन जानबूझकर सिर्फ कांग्रेस का नाम लेना गलत है।'

उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेता स्मृति ईरानी ‘यूएसएड’ की ब्रांड एंबेसडर थीं। खेड़ा ने सवाल किया, 'स्मृति ईरानी सिलेंडर लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करती थीं, तो क्या वो प्रदर्शन ‘यूएसएड’ करवा रहा था? ' उन्होंने दावा किया, 'अन्ना हजारे ने दिल्ली में आंदोलन किया, हमारी सरकार यहां हारी, फिर वो अमेरिका गए और रोड शो किया। फोर्ड फाउंडेशन का पैसा आता था, उसमें आरएसएस भी शामिल था।'

'70 साल में की गई फंडिंग पर श्वेत पत्र लाया जाए'

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सच्चाई ये है कि नरेंद्र मोदी, ट्रंप से एकतरफा रिश्ता निभाते हुए देश की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। उन्होंने भाजपा का उल्लेख करते हुए कहा, 'आप एक विशाल शीशमहल में रह रहे हैं। पत्थर मत उछालिए। आपको मुंह छिपाने की जगह नहीं मिलेगी।' खेड़ा ने कहा, 'हम चाहते हैं कि सिर्फ ‘यूएसएड’ ही नहीं, ऐसी सभी एजेंसियों द्वारा पिछले 70 साल में की गई फंडिंग पर श्वेत पत्र लाया जाए।'

ट्रंप के बयान को लेकर भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने बृहस्पतिवार को कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी से वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रचार अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दावे की पुष्टि होती है कि विदेशी ताकतें उन्हें सत्ता में आने से रोकने की कोशिश कर रही थीं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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