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बिहार: स्टेशन पर ट्रेन की शंटिंग के वक्त बफर के बीच फंसने से रेलवे कर्मचारी की दर्दनाक मौत

Railway Employee Death News: घटना उस वक्त हुई जब प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस की शंटिंग चल रही थी। इंजन और एक कोच के बफर के बीच फंसने से रेलवे कर्मचारी की मौत हो गई। मृतक की पहचान समस्तीपुर जिले के रहने वाले अमर कुमार (25) के रूप में की गई है।

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Railway Employee Death News

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Railway Employee Death News: बिहार के बेगूसराय जिले के बरौनी जंक्शन स्टेशन पर शनिवार को ट्रेन की शंटिंग की कवायद के दौरान इंजन और एक कोच के बफर के बीच फंस जाने से एक रेलवे कर्मचारी की मौत हो गई। अधिकरियों ने बताया, बफर, ट्रेन के इंजन और कोच के दोनों सिरों पर लगा एक उपकरण है जो झटके से बचाता है। बफर को बोगियों के बीच टकराव के प्रभाव को कम करने के लिए तैयार किया जाता है।

पूर्व मध्य रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि इस तरह की प्रणाली के लिए तय दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया होगा जिसके कारण यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई और जांच के आदेश दे दिए गए हैं। मृतक की पहचान समस्तीपुर जिले के रहने वाले अमर कुमार (25) के रूप में की गई है। मृतक के परिवार ने आरोप लगाया कि रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही के कारण उनकी मौत हुई।

लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस की शटिंग के वक्त हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटना उस वक्त हुई जब प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस की शंटिंग चल रही थी। इंजन और एक कोच के बफर के बीच फंसने से कुमार की मौत हो गई। बफर के बीच फंसे हुए व्यक्ति का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मृतक के परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और कहा कि वे अधिकारियों को तब तक पोस्टमार्टम नहीं करने देंगे जब तक कि दोषी रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती।

अधिकारियों के पहुंचने पर शांत हुआ मामला

सोनपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) विवेक भूषण सूद के मौके पर पहुंचने और आक्रोशित परिजनों को समझाने के बाद मामला शांत हुआ। पूर्व मध्य रेलवे की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) सरस्वती चंद्रा ने बताया कि यह घटना सुबह बरौनी स्टेशन पर हुई। चंद्रा ने कहा, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और साथ ही चिंता का विषय भी है। ऐसी कवायद के दौरान तय दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया होगा। चंद्रा ने कहा कि घटना की वजह जानने के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं और जांच पूरी होने के बाद दोषी रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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