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'लुटेरे IAS-IPS को कोर टीम बोलते हैं, बाढ़ में गया नहीं-बिहार को जाना नहीं...' प्रशांत किशोर की जन सुराज पर भड़के पप्पू यादव

Pappu Yadav on Prashant Kishor: पप्पू यादव ने कहा, प्रशांत किशोर और उनकी टीम को सामाजिक ज्ञान नहीं है। इन लोगों में से कोई भी एक गरीब के यहां नहीं गया, एक दिन बाढ़ में नहीं गया। बिहार के लोगों को जाना नहीं और चुनाव लड़ने जा रहे हैं। ये लोग लुटेरे आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को इकट्ठा करके उन्हें अपनी कोर टीम बताते हैं।

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पप्पू यादव।

Photo : ANI

Pappu Yadav on Prashant Kishor: बिहार में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को लेकर राजनीति तेज होती जा रही है। अब निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। पप्पू यादव ने कहा कि प्रशांत किशोर ने सभी लुटेरे IAS और IPS अधिकारियों को इकट्ठा किया, उन्हें अपनी कोर टीम बोलते हैं। इन लोगों ने अबतक बिहार को जाना नहीं है, ये समझते हैं कि सबकुछ पैसे से होता है।

पप्पू यादव ने कहा, प्रशांत किशोर और उनकी टीम को सामाजिक ज्ञान नहीं है। इन लोगों में से कोई भी एक गरीब के यहां नहीं गया, एक दिन बाढ़ में नहीं गया। बिहार के लोगों को जाना नहीं और चुनाव लड़ने जा रहे हैं। रिटायर्ड लोगों को बैठाकर कह रहे हैं कि मैं क्रांति करूंगा। अगर क्रांति ही करनी है तो भ्रष्टाचार को रोक कर दिखाएं।

पहले भ्रष्टाचार रोकें प्रशांत किशोर

पप्पू यादव ने कहा, इन लोगों की कोई औकात नहीं है। अगर इन्हें क्रांति ही करनी है तो पहले भ्रष्टाचार रोक कर दिखाएं। आधार कार्ड में नंबर बदलने के लिए 400 रुपए लगते हैं इसे बदल कर दिखाएं। उन्होंने कहा, जब बिहार में बाढ़ थी, तब ये लोग कहां थे? बाढ़ के दिन अपनी पार्टी बना रहे थे। गांधी जयंती के दिन कह रहे थे कि बिहार में शराब शुरू करेंगे। उन्होंने कहा, ये लोग शर्म से मर नहीं गए। पहले जहरीली शराब रोककर दिखाएं। जहरीली शराब पीकर कई सौ लोग मर गए, उनमें से 51 आदमी को पैसे देकर दिखाएं। अरबों रुपए की यात्रा करते हैं और इनके पास पैसा नहीं है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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