Bihar Election: केंद्रीय चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव और विभिन्न राज्यों में होने वाले उपचुनावों के लिए केंद्रीय प्रेक्षकों (जनरल, पुलिस और व्यय) की नियुक्ति की है। आयोग ने 470 वरिष्ठ अधिकारियों को इस जिम्मेदारी के लिए चुना है। इनमें आईएएस, आईपीएस और भारतीय राजस्व सेवा सहित अन्य सेवाओं के अधिकारी शामिल हैं।
संवैधानिक अधिकारों के तहत ऑब्जर्वर की नियुक्ति
चुनाव आयोग ने ये नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 20बी के तहत की है। इन प्रेक्षकों का काम चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है। इन ऑब्जर्वर को चुनाव आयोग का आंख और कान माना जाता है।
चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की जिम्मेदारी
ऑब्जर्वर मतदान क्षेत्र में जाकर वहां की स्थिति पर नजर रखेंगे और समय-समय पर आयोग को रिपोर्ट देंगे। वे यह देखेंगे कि चुनाव की प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो। इसके अलावा, वे मतदाताओं में जागरूकता और भागीदारी बढ़ाने में भी योगदान देंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों को मिली अहम जिम्मेदारी
चुनाव आयोग ने कुल 470 अधिकारियों को प्रेक्षक के रूप में तैनात करने का निर्णय लिया है। इनमें 320 आईएएस, 60 आईपीएस और 90 अधिकारी आईआरएस, आईआरएएस और आईसीएएस सहित अन्य सेवाओं से हैं। ये सभी अधिकारी अपने अनुभव के आधार पर आयोग की मदद करेंगे ताकि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हो सके।
बिहार और आठ राज्यों में उपचुनावों की निगरानी
इन प्रेक्षकों की तैनाती बिहार विधानसभा चुनाव के अलावा आठ राज्यों में होने वाले उपचुनावों में भी की जाएगी। जम्मू कश्मीर की बडगाम और नागरोटा विधानसभा सीटों, राजस्थान की अंता सीट, झारखंड की घाटशिला सीट, तेलंगाना की जुबली हिल्स सीट, पंजाब की तरनतारन सीट, मिजोरम की दांपा सीट और ओडिशा की नुआपाड़ा सीट पर उपचुनाव होंगे।
चुनावी खर्च पर भी नजर रखेंगे ऑब्जर्वर
व्यय प्रेक्षक उम्मीदवारों द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान किए गए खर्च पर नजर रखेंगे। उनका दायित्व होगा कि कोई भी प्रत्याशी चुनाव खर्च की तय सीमा का उल्लंघन न करे।
