देश

अधिकारों की लड़ाई में दिल्ली सरकार की बड़ी जीत-10 प्वाइंट्स में समझें SC का फैसला

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 11, 2023, 01:00 PM IST

Delhi IAS Officers: सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एकमत से अपने फैसले में साफ किया है कि राज्य के अधिकारियों पर एक चुनी हुई सरकार का अधिकार होगा और दिल्ली के उपराज्यपाल को सरकार की सलाह माननी होगी।

Image

दिल्ली बनाम केंद्र मामले में दिल्ली सरकार की बड़ी जीत

Photo : BCCL

Supreme Court: IAS अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग मामले में गुरुवार को दिल्ली सरकार की बड़ी जीत हुई है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एकमत से अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार को दिया है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि दिल्ली में एक चुनी हुई सरकार है, जो जनता के प्रति जवाबदेह है। ऐसे में अधिकारियों पर उसका अधिकार है, न कि उपराज्यपाल का।

बता दें, इसी साल 18 जनवरी को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इस मामले में चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, कृष्णा मुरारी, हिमा कोहली और पी नरसिम्हा ने फैसला सुनाया है। आइए 10 प्वाइंट में समझते हैं सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला...

  1. सीजेआई ने अपने फैसले में कहा है कि एक चुनी हुई सरकार के पास अपने अधिकारियों को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं होगा तो इससे जवाबदेही का सिद्धांत निरर्थक हो जाएगा।
  2. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक चुनी हुई सरकार के पास प्रशासनिक सेवा का अधिकार होना चाहिए। इसलिए अधिकारियों की तैनाती और तबादले का अधिकारी दिल्ली सरकार के पास होगा।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रशासन के कामों में उपराज्याल को चुनी हुई सरकार की सलाह माननी होगी।
  4. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि दिल्ली की कानून व्यवस्था, पुलिस और भूमि के विषय को छोड़कर सभी मुद्दों पर दिल्ली सरकार को विधाई अधिकार होगा।
  5. संविधान पीठ ने साफ किया कि संविधान के अनुच्छेद 239 AA से यह स्पष्ट है कि दिल्ली में एक चुनी हुई सरकार है और यह सरकार लोगों के प्रति जवाबदेह है।
  6. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि NCT एक पूर्ण राज्य नहीं है। दिल्ली के अधिकार दूसरे राज्यों की तुलना में कम है। संविधान के अनुच्छेद 239 AA से यह स्पष्ट है कि केवल कुछ खास विषयों जैसे- पुलिस, भूमि और लैंड ऑर्डर दिल्ली सरकार के अधिकार से बाहर हैं।
  7. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले का कारण बताते हुए कहा कि प्रविष्टि 41 के तहत एनसीटी दिल्ली की विधाई शक्ति आईएएस तक विस्तारित होगी और एनसीटी दिल्ली द्वारा भर्ती नहीं होने पर भी उन्हें नियंत्रित करेगी।
  8. राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के पास समवर्ती सूची के तहत विषयों पर कानून बनाने की शक्ति है, वही मौजूदा केंद्रीय कानून के अधीन है। यह सुनिश्चित करना होगा कि राज्यों का शासन केंद्र सरकार द्वारा अपने हाथ में न ले लिया जाए।
  9. सुप्रीम कोर्ट ने कहा तीसरी अनुसूची में किसी भी विषय पर कानून बनाने की पूर्ण शक्ति है। यदि केंद्र और राज्य के कानूनों के बीच विरोध होता है, तो केंद्रीय कानून प्रबल होगा।
  10. केंद्र द्वारा सभी विधाई शक्तियों को अपने हाथ में लेने से संघीय प्रणाली समाप्त हो जाती है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article