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सुप्रीम कोर्ट से बिभव कुमार को जमानत, स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट का है आरोप

Bibhav Kumar bail News: स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट के आरोपी बिभव कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ सीएम हाउस में मारपीट के आरोप के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

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बिभव कुमार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली।

Bibhav Kumar bail: स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट के आरोपी बिभव कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। लंबे समय से जेल में बंद बिभव कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने आज जमानत दे दी। आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ सीएम हाउस में मारपीट के आरोप के बाद उन्हें 18 मई को गिरफ्तार किया गया था। बता दें, इस मामले में निचली अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट बिभव कुमार की जमानत याचिका खारिज कर चुकी थीं, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुईयां की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में जांच पूरी हो गई और चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। याचिकाकर्ता को अब जांच की जरूरत नहीं है। वह 100 दिन से ज्यादा जेल में रह चुका है। तथ्यों की समग्रता पर विचार किया गया है, गुण-दोष पर विचार नहीं किया गया है, इसलिए हम जमानत देते हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने कहा कि सीएम हाउस में सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई है। इसलिए अदालत को घटना पर ध्यान देना चाहिए सीएम के आवास पर एक महिला सांसद से इसतरह से मारपीट की गई ये गंभीर मामला है।

सुप्रीम कोर्ट ने तय की जमानत की शर्तें

1. बिभव की दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव पद पर नियुक्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने ये भी कहा कि CM ऑफिस से जुड़ा भी कोई राजनीतिक पद बिभव को नहीं दिया जाएगा।

2. जब तक सभी अहम गवाहों के बयान नहीं हो जाते तब तक बिभव मुख्यमंत्री के ऑफिस और घर में नहीं जाएंगे।

3. आम आदमी पार्टी से जुड़ा कोई भी पदाधिकारी केस की मेरिट पर इस केस के पूरा होने तक किसी तरह की बयानबाजी नहीं करेगा।

सिंघवी ने किया शर्तों का विरोध

वहीं, सुप्रीम कोर्ट में जमानत की शर्त तय करते वक्त बिभव के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मारपीट के केस के बारे में टिप्पणी नहीं करने की शर्त तो ठीक है लेकिन मुख्यमंत्री के ऑफिस या घर जाने पर रोक न लगाई जाए। वो कोई सरकारी पद पर भी नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने तीन महीनों की रोक इसलिए लगाई है ताकि इस दौरान संवेदनशील गवाहों की गवाही और जांच दिल्ली पुलिस पूरी कर ले। इस पर दिल्ली पुलिस की तरफ से ASG एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इसे भी ध्यान में रखना चाहिए कि इस मामले में पीड़ित(महिला सांसद) कौन है और आरोपी(सीएम का करीबी) कौन और जिस जगह(सीएम आवास) अपराध हुआ वो जगह कौन सी है?

क्या है पूरा मामला

बता दें, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंंद केजरीवाल के आवास पर यह घटना 13 मई को हुई थी। दिल्ली में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सुबह-सुबह स्वाति मालीवाल केजरीवाल से मिलने उनके आवास पर पहुंची थी। सीएम आवास पर केजरीवाल के निजी सचिव बिभव कुमार भी मौजूद थे। स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि बिभव कुमार ने उन्हें सीएम हाउस में जाने से रोका और बाद में उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट भी की। इस घटना का सीवीटीवी फुटेज भी सामने आया था। चुनाव से ठीक पहले हुई इस घटना ने काफी तूल पकड़ा था।
Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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