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कौन हैं स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरना देने वाली डॉ शशि पांजा? जानें आंध्र की बेटी ने बंगाल की राजनीति में कैसे बनाई पहचान

Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले दो चरणों में रिकॉर्ड स्तर की वोटिंग (92.88% और 91.66%) ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान शांतिपूर्ण रहा, लेकिन वोटिंग के बाद टीएमसी ने ईवीएम स्ट्रांग रूम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। शशि पांजा और कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि स्ट्रांग रूम को बिना अनुमति खोला गया और अंदर संदिग्ध गतिविधियां हुईं। इस मुद्दे पर कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन भी हुआ।

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टीएमसी विधायक शशि पांजा ने कोलकाता में स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर दिया था धरना। AI IMAGE

Bengal Election: बंगाल चुनाव ने देश की राजनीति को नई दिशा दे दी है। पहले फेज में 92.88 प्रतिशत तो दूसरे फेज में 91.66 प्रतिशत वोटिंग हुई। इस वोटिंग प्रतिशत ने बड़े राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। सुरक्षाबलों और पुलिस फोर्स की जबरदस्त तैनाती के बीच हुई वोटिंग में हिंसा की कोई बड़ी खबरें तो नहीं आई, लेकिन वोटिंग के बाद एक ऐसी घटना घटी, जिसने खूब सुर्खियां बटोरी।

दरअसल, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने ईवीएम (EVM) स्ट्रांग रूम के बाहर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि पार्टी प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में ही स्ट्रांग रूम खोले गए और मतपेटियों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई।

जब स्ट्रांग रूम के बाहर धरने पर बैठीं शशि पांजा

आरोप लगाने वालों में बंगाल की मंत्री शशि पांजा सबसे मुखर थीं। उनके अलावा, टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष भी थे। दोनों नेता, कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम के बाहर बने EVM स्ट्रांग रूम के बाहर धरने पर बैठ गए।

मंत्री शशि पांजा ने आरोप लगाया कि सीलबंद स्ट्रांग रूम के अंदर 'असामान्य मानवीय गतिविधि' देखी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्ट्रांग रूम को सुबह ही सील कर दिया गया था, तो उसे दोबारा क्यों खोला गया? टीएमसी नेताओं का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोग अंदर काम करते और गुलाबी रंग के कागज व मतपत्रों के साथ दिखाई दिए हैं। कुणाल घोष ने कहा कि उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है और न ही इस बारे में कोई पूर्व सूचना दी गई थी।

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टीएमसी विधायक शशि पांजा की फाइल फोटो।

इस घटना के बाद हर तरफ शशि पांजा की चर्चा होने लगी। आइए जानते हैं कि कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाली शशि पांजा आखिर बंगाल की राजनीति में कैसे सक्रिय हो गईं?

शशि पांजा का जीवन दो संस्कृतियों का खूबसूरत संगम है। तेलुगु परिवार में जन्मी शिश पांजा पेशे से डॉक्टर हैं। वहीं, वो ससुराल से बंगाली हैं।

उनकी शादी पश्चिम बंगाल के प्रतिष्ठित 'पांजा' परिवार में हुई। उनके ससुर, अजीत कुमार पांजा, भारतीय राजनीति के दिग्गज और पूर्व केंद्रीय मंत्री थे। उनकी बेटी पूजा पांजा भी सक्रिय राजनीति में हैं और कोलकाता नगर निगम में पार्षद हैं।

डॉक्टरी पेशा और शिक्षाराजनीति में आने से पहले शशि पांजा एक सफल चिकित्सक (BDS) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं। स्वास्थ्य क्षेत्र में उनके अनुभव ने उन्हें भविष्य में ममता बनर्जी की कैबिनेट में स्वास्थ्य राज्य मंत्री जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाने में मदद की।

राजनीतिक करियर की शुरुआत

उन्होंने अपने ससुर अजीत पांजा की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। शशि पांजा ने अपने सफर की शुरुआत कोलकाता नगर निगम की पार्षद और मेयर-इन-काउंसिल (शिक्षा) के रूप में की थी। वर्तमान में वह कोलकाता की श्यामपुकुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह इस सीट से लगातार जीत हासिल करती आ रही हैं।

सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

ममता बनर्जी की कैबिनेट में वह एक भरोसेमंद चेहरा मानी जाती हैं। वर्तमान में उनके पास मुख्य रूप से दो बड़े मंत्रालय हैं:

महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण: महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए वह लंबे समय से काम कर रही हैं।

उद्योग, वाणिज्य और उद्यम: राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है।

क्या है RG Kar कनेक्शन ?

हाल के महीनों में, आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज मामले के दौरान डॉ. शशि पांजा काफी चर्चा में रहीं। वह उन चुनिंदा मंत्रियों में शामिल थीं, जो सरकार की ओर से पक्ष रख रही थीं। चिकित्सा पृष्ठभूमि से होने के कारण उन पर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे, लेकिन उन्होंने सरकार की नीतियों का पुरजोर बचाव किया।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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