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बदरीनाथ-केदारनाथ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगेगी रोक! सिर्फ मुस्लिम या इन धर्मों के लोगों का भी आना हो जाएगा मना?

श्रीगंगा सभा द्वारा हाल ही में हर की पैड़ी समेत कई घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद अब बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति भी ऐसा ही कुछ करने जा रही है। मंदिर समिति अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने की तैयारी में है। जिसके बाद बदरीनाथ और केदारनाथ में गैर हिंदुओं का प्रवेश बैन हो जाएगा। इस फैसले को लेकर देश की सियासत में भूचाल आ गया है।

Kedarnath Badrinath dham

केदारनाथ-बदरीनाथ धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन।

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अंतर्गत आने वाले मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर रोक की तैयारी शुरू हो गई है। मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस बाबत जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इस बारे में मंदिर समिति की आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा और उसे पारित किया जाएगा। अब इसको लेकर न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में एक नई बहस छिड़ गई है। मंदिर समिति का दावा है कि बदरीनाथ और केदारनाथ सिर्फ पर्यटन के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे वैदिक परंपरा और सनातन के प्रचीन केंद्र हैं। ऐसे में यहां के प्रवेश को नागरिक अधिकार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ऐसे में जब मंदिर समिति यह तैयारी कर रही है तो यह जानना भी बेहद अहम हो जाता है कि अगर यह नियम भविष्य में बने तो सिर्फ मुस्लिम ही इसके दायरे में आएंगे या फिर जैन, पारसी, बौद्ध और सिख जैसे धर्मों के गैर हिंदुओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा?

सबसे पहले ये जानें मदिर समिति के अध्यक्ष का क्या है कहना?

गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक संबंधी मामले को लेकर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी और ये सनातन परंपरा के प्रमुख केंद्र हैं। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 26 का हवाला देते हुए कहा कि यह अनुच्छेद प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है।

द्विवेदी ने कहा कि यह निर्णय किसी के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य सदियों पुरानी आस्था, अनुशासन और पवित्रता की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जैसे मस्जिदों और चर्चों में धार्मिक आचरण से जुड़े नियम होते हैं, वैसे ही हिंदू धार्मिक स्थलों की भी अपनी परंपरागत मर्यादाएं हैं।

सिख और जैन समुदाय के लोगों के सवाल पर क्या बोले?

आगे गैर-हिंदू श्रद्धालुओं, विशेषकर सिख और जैन समुदाय के लोगों के लंबे समय से बदरीनाथ और केदारनाथ आने के सवाल पर द्विवेदी ने कहा कि मामला किसी विशेष धर्म का नहीं, बल्कि आस्था और धार्मिक अनुशासन का है। उन्होंने कहा कि जो भी सनातन धर्म में आस्था रखता है, उसके लिए बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के द्वार खुले हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की उपस्थिति भी इसी भावना के अनुरूप थी।

सूबे के सीएम का क्या कहना है?

इस बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाएगी और सभी संबंधित पक्षों की राय सुनेगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए द्विवेदी ने कहा कि धार्मिक संगठनों, तीर्थ पुरोहितों, संतों और स्थानीय संस्थाओं के विचारों को ध्यान में रखा जाएगा। साथ ही, पूर्व में बनाए गए कानूनों की भी समीक्षा की जा रही है।

विपक्ष लगा रहा ये आरोप

वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि कई तीर्थ स्थलों पर पहले से ही स्थानीय नियम और परंपराएं लागू हैं, लेकिन इस विषय को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रतिबंध लगाना है तो सभी स्थानों पर एक साथ लगाया जाना चाहिए। हरीश रावत ने यह भी कहा कि देश में कई मंदिरों के निर्माण में गैर-हिंदू समुदायों का योगदान रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका आरोप है कि जहां दुनिया के कई धर्म अपने मूल्यों को साझा करने के लिए दूसरों को आमंत्रित कर रहे हैं, वहीं यहां पाबंदियों की बात की जा रही है।

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शिव शुक्ला
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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