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बैन के बावजूद पंजाब के गांवों में दिखाई जा रही है दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज', गुरुद्वारों से हो रही अनाउंसमेंट; रवनीत बिट्टू ने जताई आपत्ति

Satluj Movie Punjab Ban:पंजाब में बैन के बावजूद दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' की निजी और सार्वजनिक स्तर पर धड़ल्ले से स्क्रीनिंग की जा रही है। अमृतसर, गुरदासपुर और संगरूर जैसे जिलों में बकायदा गुरुद्वारों से अनाउंसमेंट कर लोगों को यह फिल्म दिखाई जा रही है।

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'सतलुज' फिल्म पर रोक के खिलाफ लामबंद हुए पंजाब के कई संगठन

Photo : Times Now Digital

Satluj Movie Punjab Ban: पंजाब में अभिनेता दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh Satluj Film) की फिल्म 'सतलुज' को रिलीज करने की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। कई सिख संगठनों और राजनीतिक दलों के दबाव के बीच, फिल्म पर लगी रोक का जमीन पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है। पंजाब के कई जिलों जैसे अमृतसर, गुरदासपुर, संगरूर, मोगा और पटियाला में निजी और सार्वजनिक स्तर पर इस फिल्म की धड़ल्ले से स्क्रीनिंग की जा रही है।

हद तो यह है कि लोगों को फिल्म दिखाने के लिए बकायदा गुरुद्वारों के लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट की जा रही है। विपक्ष की मुख्य पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने भी ऐलान किया है कि वे इस फिल्म को पूरे पंजाब के गांव-गांव जाकर लोगों को दिखाएंगे। गुरदासपुर के मांनचोपड़ा गांव में बुधवार रात को ऐसी ही एक स्क्रीनिंग रखी गई। गुरुद्वारा साहिब से बाकायदा मुनादी कराकर ग्रामीणों को फिल्म देखने के लिए बुलाया गया।

जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष पर आधारित फिल्म

इस फिल्म की कहानी 90 के दशक के काले दौर और मानव अधिकार कार्यकर्ता भाई जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष पर आधारित है। फिल्म देखने आए लोगों का कहना है कि उस दौर में पंजाब के नौजवानों, बुजुर्गों और महिलाओं को आतंकवादी बताकर उनके फर्जी एनकाउंटर किए गए और लाशों को लावारिस घोषित कर जला दिया गया। जसवंत सिंह खालड़ा ने जब इस सच को उजागर किया, तो उनका भी एनकाउंटर कर दिया गया।

रवनीत सिंह बिट्टू ने सरकार का रखा पक्ष

लोगों का आरोप है कि सरकार पंजाब के इस दर्दनाक इतिहास को छुपाना चाहती है, इसलिए फिल्म को बैन किया गया है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि सरकार इस फिल्म को जितना दबाएगी, वे इसे उतना ही लोगों तक पहुंचाएंगे। दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद पर केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि इस फिल्म की रोक से बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि उस दौर में बीजेपी सत्ता में नहीं थी।

हालांकि, उन्होंने फिल्म के कंटेंट पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कहानी में दोनों पक्षों की बात दिखाई जानी चाहिए थी। बिट्टू ने याद दिलाया कि उस दौर में आतंकवादियों ने कई निर्दोष प्रवासियों और आम नागरिकों का भी कत्लेआम किया था। पंजाब पुलिस ने आतंकवाद को खत्म करने के लिए शानदार काम किया, जिसके लिए कई अफसरों को बहादुरी के पुरस्कार मिले। मंत्री ने चेतावनी दी कि फिल्म में जो एकतरफा सच दिखाने की कोशिश हो रही है, उससे युवाओं के मन में पुलिस के प्रति नफरत और गुस्सा बढ़ेगा, जो राज्य की शांति के लिए ठीक नहीं है।

Manoj Kumar
मनोज कुमार author

मनोज कुमार को टीवी पत्रकारिता में काम करने का 20 साल का अनुभव है. वर्तमान में वह Times Now नवभारत में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. 20... और देखें

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