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Ujjain Mahakal: महाकाल का खजाना हुआ मालामाल, सावन महीने में बाबा के खाते में जमा हुए 200 करोड़ रुपये

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 10, 2023, 10:28 AM IST

Ujjain Mahakal: श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के अध्यक्ष कुमार पुरुषोत्तम ने बताया कि श्रावण मास में एक करोड़ श्रद्धालु बाबा के दरबार में आए हैं। महाकालेश्वर प्रबंध समिति के पास 40 करोड़ रुपये की एफडी थी, जो अब बढ़कर 200 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

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महाकालेश्वर मंदिर

Photo : BCCL

Ujjain Mahakal: सावन के महीने में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भक्तों का तांता लगा हुआ है। श्रद्धालुओं की उमड़ती हुई संख्या जहां नए रिकॉर्ड बना रही है तो वहीं बाबा महाकाल का खजाना भी बढ़ता जा है। चार जुलाई से शुरू हुए श्रावण मास से अब तक महाकाल के खाते में 200 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं।

मंदिर की प्रबंध समिति का कहना है कि इस साल दो अधिकमास होने के कारण दो श्रावण हैं। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि बाबा महाकाल के खजाने में भी काफी चढ़ावा आएगा और इसमें अप्रत्याशित रूप से वृद्धि होगी।

40 करोड़ की एफडी बढ़कर हुई 200 करोड़

श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के अध्यक्ष कुमार पुरुषोत्तम ने बताया कि श्रावण मास में एक करोड़ श्रद्धालु बाबा के दरबार में आए हैं। इस कारण बाबा के मंदिर में चढ़ावा भी खूब चढ़ा है, जिससे उनके खजाने में बढ़ोतरी हुई है। पहले महाकालेश्वर प्रबंध समिति के पास 40 करोड़ रुपये की एफडी थी, जो अब बढ़कर 200 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

करीब 9 लाख लोगों ने किए भस्म आरती के दर्शन

श्रावण मास शुरू होने के साथ ही बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भक्त बड़ी संख्या में आ रहे हैं। ऐसे में भक्तों के बढ़ते दबाव के कारण मंदिर समिति ने बाबा के दर्शन के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति श्रद्धालुओं को सुगम व सुखद दर्शन करवा रही है। भस्म आरती हर दिन सुबह 2 बजे से सुबह 7 बजे तक हो रही है। इसमें करीब नौ लाख लोग (8,89,226) भक्तों ने दर्शन किए हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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