कांग्रेस नेता गौरव पांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) के दिवंगत नेता अटल बिहारी वाजपेयी को अंग्रेजों का जासूस बताया है। उन्होंने दावा किया है उन्होंने ब्रिटिश मुखबिर के नाते काम किया। साथ ही नेली नरसंहार हो या फिर बाबरी विध्वंस...उन्होंने भीड़ को भड़काने में अहम भूमिका निभाई थी।
पार्टी चीफ मल्लिकार्जुन खड़गे के दफ्तर में एआईसीसी (ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी) के कॉर्डिनेटर ने रविवार (25 दिसंबर, 2022) को माइक्रो ब्लॉगिंग मंच टि्वटर पर दो ट्वीट्स किए, जिनमें उन्होंने ये बातें कहीं।

Gaurav Pandhi
उनके मुताबिक, "साल 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के और सभी सदस्यों की तरह वाजपेयी ने भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) का बहिष्कार किया था और उन्होंने आंदोलन में हिस्सा लेने वाले लोगों के खिलाफ ब्रिटिशर्स के मुखबिर की भूमिका निभाई थी। नेली नरसंहार (Nellie Massacre) हो या बाबरी विध्वंस (Babri Demolition)...वाजपेयी ने भीड़ को उकसाने में अहम भूमिका निभाई।"
बकौल पांधी, "यही वजह है कि आज भाजपा नेता हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल या अन्य कांग्रेस नेताओं से करते हैं न कि वीडी सावरकर, वाजपेयी या फिर गोलवलकर से। वे सच्चाई जानते हैं!।"
दरअसल, रविवार (25 दिसंबर, 2022) को पूर्व पीएम अटल की 98वीं जयंती थी। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्में (25 दिसंबर 1924) वाजपेयी के बर्थडे को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है। वह बीजेपी के संस्थापकों में से एक थे और तीन बार प्रधानमंत्री रहे। उनका पहला कार्यकाल 1996 में मात्र 13 दिनों का था।
फिर वह 1998 में पीएम बने और आगे 13 महीने तक इस पद पर रहे थे। 1999 में वह तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया।
