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असम में TMC को बड़ा झटका, पार्टी प्रेसीडेंट रिपुन बोरा ने दिया इस्तीफा

Assam TMC President Resigns: असम में तृणमूल कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रिपुन बोरा ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा, टीएमसी खुद को पश्चिम बंगाल की एक क्षेत्रीय पार्टी के रूप में देखती है।

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असम टीएमसी अध्यक्ष रिपुन बोरा ने दिया इस्तीफा।

Photo : Twitter

Assam TMC President Resigns: तृणमूल कांग्रेस को असम में बड़ा झटका लगा है। यहां पार्टी अध्यक्ष रिपुन बोरा ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नाम लिखा है। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके प्रयासों के बावजूद उन्हें ममता बनर्जी और खुद अभिषेक बनर्जी से मिलने का मौका नहीं दिया गया।

रिपुन बोरा ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि असम में टीएमसी की बहुत संभावनाएं हैं। हालांकि, कई बार-बार सामने आने वाले मुद्दों ने हमारी प्रगति में बाधा डाली है, जिसमें टीएमसी को पश्चिम बंगाल की एक क्षेत्रीय पार्टी के रूप में देखना भी शामिल है। इस धारणा का मुकाबला करने के लिए हमने कई सुझाव दिए हैं। जैसे कि राष्ट्रीय स्तर पर एक असमिया नेता की आवश्यकता, टॉलीगंज में भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका के निवास को एक विरासत स्थल घोषित करना और कूच बिहार में मधुपुर सत्र को एक सांस्कृतिक केंद्र में बदलना, लेकिन इन पर कोई काम नहीं किया गया।

'मैं असफल रहा...'

इन चिंताओं को दूर करने के लिए पिछले डेढ़ साल से आपसे और हमारी मुख्यमंत्री ममता दीदी से मिलने का समय लेने के मेरे लगातार प्रयासों के बावजूद, मैं असफल रहा हूं। उन्होंने कहा कि वह दो साल से अधिक समय तक टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और इस दौरान उन्होंने राज्य भर के लोगों के साथ व्यापक स्तर पर संवाद स्थापित किया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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