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'वो दिन दूर नहीं जब संसद में किसी मुसलमान की होगी मॉब लिंचिंग...' बिधूड़ी के बिगड़े बोल पर भड़के औवैसी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 25, 2023, 06:42 AM IST

Asaduddin Owaisi: ओवैसी ने कहा, हम देखते हैं कि संसद में भाजपा का एक सांसद एक मुसलमान सांसद को गाली देता है। लोग कह रहे हैं संसद में नहीं बोलना चाहिए था, बोल रहे हैं ज़ुबान खराब थी। यह तो आवाम का नुमांइदा है जिसे तुमने वोट दिया। वह दिन दूर नहीं जब देश की संसद में किसी मुसलमान की मॉब लिंचिंग होगी।

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असदुद्दीन ओवैसी

Photo : ANI

Asaduddin Owaisi: भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी द्वारा संसद में इस्तेमाल किए गए अपशब्दों का मामला बढ़ता जा रहा है। अब AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रमेश बिधूड़ी और भाजपा पर करार हमला बोला है। हैदराबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, वह दिन दूर नहीं है कि जब देश की संसद में मुसलमान की मॉब लिंचिंग की जाएगी।

ओवैसी ने कहा, हम देखते हैं कि संसद में भाजपा का एक सांसद एक मुसलमान सांसद को गाली देता है। लोग कह रहे हैं संसद में नहीं बोलना चाहिए था, बोल रहे हैं ज़ुबान खराब थी। यह तो आवाम का नुमांइदा है जिसे तुमने वोट दिया। वह दिन दूर नहीं जब देश की संसद में किसी मुसलमान की मॉब लिंचिंग होगी। उन्होंने भाजपा व प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया कहां गया आपका सबका साथ, सबका विकास?

मुसलमानों का नाम लेने से डरते हैं सपा और कांग्रेस

असदुद्दीन ओवैसी ने इस दौरान कहा, भाजपा के नेता कहते हैं कि हमारे दो सांसदों ने महिला आरक्षण बिल के खिलाफ वोट किया। 450 सांसदों ने बिल के पक्ष में वोट किया और केवल 2 ने बिल के खिलाफ वोट किया। जब सभी ने कहा कि 450 सांसद मेरे खिलाफ हैं, तो मैंने पूरे देश को बताया कि कांग्रेस और बीजेपी एक साथ हैं, समाजवादी (पार्टी) और कांग्रेस भी एक साथ हैं। मैं अकेले पीएम मोदी के खिलाफ लड़ रहा हूं और आप सब एक साथ हैं। उन्होंने कहा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और लालू यादव की पार्टी (आरजेडी) के नेता संसद में मुसलमानों का नाम लेने से डरते हैं। मैं खड़ा हुआ और कहा कि मुस्लिम और ओबीसी महिलाओं को भी आरक्षण मिलना चाहिए। वे मुझसे कहते रहते हैं कि मैं महिलाओं के खिलाफ हूं, लेकिन सच्चाई यह है कि आप महिलाओं, ओबीसी और मुसलमानों के खिलाफ हैं।

राहुल को हैदराबाद से लड़ने की चुनौती

इस दौरान ओवैसी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी करारा हमला किया। उन्होंने कहा, मैं राहुल गांधी को वायनाड से नहीं बल्कि हैदराबाद से चुनाव लड़ने की चुनौती देता हूं। आप बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, ज़मीन पर आइए मुकाबला करेंगे। कांग्रेस के लोग बहुत बातें करेंगे, लेकिन मैं तैयार हूं। उन्होंने कहा,यही कांग्रेस थी जब बाबरी मस्जिद और सचिवालय की मस्जिद गिराई गई थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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