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केजरीवाल कब खाली करेंगे मुख्यमंत्री आवास, अब कहां रहेंगे? AAP ने बता दिया सबकुछ

When will Kejriwal vacate CM Residence: दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास को अरविंद केजरीवाल कब खाली करेंगे? ये सवाल सभी के जेहन में है, इस बीच आम आदमी पार्टी ने ये जानकारी साझा की है कि केजरीवाल एक से दो दिनों में मुख्यमंत्री आवास खाली कर देंगे। उनके लिए एक नया घर फाइनल हो गया है।

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल।

Delhi News: आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल सिविल लाइंस में ‘फ्लैगस्टाफ रोड’ पर स्थित दिल्ली के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास अगले एक दो दिनों में खाली कर देंगे क्योंकि उनके लिए नयी दिल्ली क्षेत्र में एक आवास तय हो गया है, जहां वह अपने परिवार के साथ रहने के लिए आएंगे। आप ने बुधवार को यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री आवास के बाद अब कहां रहेंगे केजरीवाल?

पार्टी सूत्रों ने दावा किया कि केजरीवाल अपने परिवार के साथ मंडी हाउस के पास फिरोज शाह रोड पर आप के राज्यसभा सांसदों को आवंटित दो सरकारी बंगलों में से एक में रहने के लिए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों बंगले रविशंकर शुक्ला लेन स्थित आप मुख्यालय से कुछ ही मीटर की दूरी पर हैं।

सरकारी आवास खाली कर देंगे अरविंद केजरीवाल

इस महीने की शुरुआत में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले केजरीवाल ने कहा कि वह नवरात्रि के दौरान फ्लैगस्टाफ रोड स्थित सरकारी आवास खाली कर देंगे। हिंदुओं का का यह त्योहार बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा है। पार्टी ने एक बयान में कहा, 'केजरीवाल अगले एक - दो दिनों में मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास खाली कर देंगे, क्योंकि उनके और उनके परिवार के लिए एक आवास तय कर लिया गया है।'

पार्टी ने कहा कि केजरीवाल अपने परिवार के साथ नयी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में रहेंगे, जिसका प्रतिनिधित्व वे दिल्ली विधानसभा में करते हैं। इससे पहले, आप ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय पार्टी के प्रमुख के रूप में केजरीवाल को आधिकारिक आवास दिए जाने की भी मांग की थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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