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'अमित शाह को जवाब देना चाहिए...' दिल्ली के स्कूलों में बम की धमकी को लेकर केजरीवाल ने BJP पर साधा निशाना

Delhi schools Bomb Threat: अरविंद केजरीवाल ने अपने पोस्ट में कहा, दिल्ली वालों ने दिल्ली में कानून व्यवस्था की इतनी बुरी हालत पहले कभी नहीं देखी थी। अमित शाह को आकर दिल्ली वालों को जवाब देना चाहिए।

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Arvind Kejriwal

Delhi schools Bomb Threat: दिल्ली के करीब 40 स्कूलों में बम की धमकी मिलने के बाद मुख्यमंत्री आतिशी व आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा ने निशाना साधा है। उन्होंने राजधानी दिल्ली की कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सीएम आतिशी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा, दिल्ली में रोजमर्रा होने वाली फिरौती, हत्याओं, गोलीबारी की घटनाओं के बाद अब स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं। दिल्ली में लॉ एंड ऑर्डर की ऐसी बदहाल हालत पहले कभी नहीं रही। भाजपा शासित केंद्र सरकार दिल्ली वालों को सुरक्षा देने के अपने इकलौते काम में फेल हो चुकी है।

वहीं, अरविंद केजरीवाल ने अपने पोस्ट में कहा, दिल्ली वालों ने दिल्ली में कानून व्यवस्था की इतनी बुरी हालत पहले कभी नहीं देखी थी। अमित शाह को आकर दिल्ली वालों को जवाब देना चाहिए। गौरतलब है कि रविवार सुबह दिल्ली के दो बड़े नामी स्कूल डीपीएस आरके पुरम और पश्चिम विहार के जीडी गोयनका को बम से उड़ाने की धमकी मिली, इसके बाद सामने आया कि करीब 40 स्कूलों को ऐसी ही धमकी ई-मेल के जरिए दी गई है।

फर्जी निकली बम की धमकी

इस धमकी के बाद स्कूल प्रशासन ने एहतियातन सभी बच्चों को घर भेज दिया है। धमकी की सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस और फायर ब्रिगेड के अधिकारी फौरन मौके पर पहुंचे। पुलिस ने अपने बयान में डीपीएस और जीडी गोयनका स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिलने की पुष्टि की है। पुलिस ने बताया कि इसकी जांच की जा रही है। फिलहाल जांच में किसी भी प्रकार का कोई संदिग्ध तथ्य बाहर निकलकर सामने नहीं आया है। इससे पहले 20 नवंबर को रोहिणी के वेंकटेश्वर ग्लोबल स्कूल को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। वहीं, तमिलनाडु के एक सीआरपीएफ स्कूल को भी 21 अक्टूबर को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। हाल ही में जितने भी स्कूलों, एयरलाइंस, होटलों और स्टेशनों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है, वो सभी झूठी ही साबित हुईं हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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