Khargone Violence: रामनवमी के मौके पर खरगोन हिंसा के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया था कि वह दावा न्यायाधिकरण का गठन करेंगे। उस पर अमल करते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने न्यायाधिकरण के गठन के लिए मंगलवार को अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार इस न्यायाधिकरण के जरिए सांप्रदायिक हिंसा में शामिल लोगों से नुकसान की वसूली की कार्रवाई करेगी।
दो सदस्यीय होगा न्यायाधिकरण
अधिसूचना के अनुसार रविवार को खरगोन शहर में हुई हिंसा के दौरान हुए नुकसान के आकलन से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए, सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति वसूली अधिनियम-2021 के प्रावधानों के तहत न्यायाधिकरण का गठन किया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश डॉ शिवकुमार मिश्रा और राज्य सरकार के सेवानिवृत्त सचिव प्रभात पाराशर की अध्यक्षता वाला न्यायाधिकरण के दो सदस्य होंगे। न्यायाधिकरण तीन महीने की अवधि में काम पूरा करेगा।
ऐसे होगी वसूली
न्यायाधिकरण ऐसे मामलों में शामिल दंगाइयों से नुकसान की वसूली भी सुनिश्चित करेगा।गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि नुकसान का आकलन करने और दंगाइयों से नुकसान की वसूली के लिए न्यायाधिकरण का गठन किया जाएगा। रामनवमी के जुलूस के दौरान पथराव और आगजनी के बाद रविवार को पूरे खरगोन शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया था। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि हिंसा के सिलसिले में करीब 100 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
कब हुई हिंसा
रविवार को बड़े पैमाने पर रामनवमी का जुलूस निकालने के दौरान हिंसा हुई थी। खरगोन के अपर जिलाधिकारी सुमेर सिंह मुजाल्दे ने रविवार को बताया था कि जिला मुख्यालय स्थित तालाब चौक पर रामनवमी का जुलूस निकलते ही कुछ उपद्रवियों ने जुलूस में शामिल लोगों पर पथराव कर दिया, पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इन घटनाओं में पुलिसकर्मियों समेत कुछ लोग घायल भी हुए हैं। यह जुलूस पूरे शहर में निकलना था, लेकिन हिंसा को देखते हुए इसे आधे रास्ते में खत्म कर दिया गया। इसी तरह की पथराव की घटना बड़वानी जिले के सेंधवा कस्बे में रामनवमी के जुलूस के दौरान सामने आई जिसमें एक थाना प्रभारी और पांच अन्य घायल हो गए।

