राज्यपाल जगदीप धनखड़ के निशाने पर ममता बनर्जी, बोले- राज्य में राजनीतिक पुलिस कर रही है काम

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 9, 2021, 10:43 PM IST

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा बंगाल में हैं को राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की और कहा राज्य में कानून व्यवस्था के बारे में हर एक शख्स को जानकारी है।

राज्यपाल जगदीप धनखड़ के निशाने पर ममता बनर्जी, बोले- राज्य में राजनीतिक पुलिस कर रही है काम

नई दिल्ली।  पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने रहा कि राज्य में सुरक्षा का घेरा खतरे में है। यही नहीं पूरे राज्य में अल कायदा फैल रहा है, अवैध बम बनाने का कारोबार जोरों पर है, इस धंधे को संरक्षण दिया जा रहा है। ऐसी सूरत में वो बार बार राज्य सरकार के सवाल पूछते हैं कि आखिर प्रशासनिक और पुलिस मिशनरी क्या कर रही है।  राज्य में DGP की स्थिति क्या है उसके बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है। मेरा मानना है कि हमारे पास राजनीतिक पुलिस है।

दुखता है मेरा दिल
जगदीप धनखड़ ने कहा कि मेरा दिल दुखता है कि संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करते हुए, 'मां भारती' के एक बच्चे को पश्चिम बंगाल में एक बाहरी व्यक्ति कहा जाता है क्योंकि वह राज्य से संबंधित नहीं है। हम सभी 'माँ भारती' के बच्चे हैं और हम अपनी एकता में विश्वास करते हैं। इस भूमि में रहने वाला कोई भी व्यक्ति बाहरी व्यक्ति नहीं हो सकता है।



2021, पश्चिम बंगाल के लिए चुनौती वाला साल
2021 पश्चिम बंगाल के लिए एक चुनौतीपूर्ण वर्ष है क्योंकि यह विधानसभा चुनावों के लिए जाता है। यह WB के लिए छवि के बदलाव में संलग्न होने का एक बड़ा अवसर है क्योंकि अभी तक WB में बड़े पैमाने पर चुनाव हुए हैं, जिसमें हिंसा और अफसरशाही और पुलिस की भूमिका के मतदाताओं के बुनियादी अधिकारों से समझौता किया गया है।यह हमारे लिए सर्वोत्तम प्रथाओं में उलझाकर एक उदाहरण स्थापित करने का समय है, ताकि हर मतदाता स्वतंत्र रूप से एक शांतिपूर्ण माहौल में अपने मताधिकार को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सके, जहां हिंसा की कोई भूमिका नहीं है।

ममता बनर्जी भी साधती हैं निशाना
राज्यपाल जगदीप धनखड़ जब इस तरह का बयान देते हैं तो टीएमसी की तरफ से पलटवार होता है। सीएम ममता बनर्जी कहती हैं कि राज्यपाल महोदय संवैधानिक शख्सियत की जगह किसी राजनैतिक शख्स की तरह व्यवहार करते हैं। उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। लेकिन हकीकत में वो संवैधानिक सिस्टम की धज्जियां उड़ाते हैं। 

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