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फिर सामने आया हैकिंग का भूत: महुआ, थरूर, राघव और ओवैसी का दावा- 'फोन हैक कर रही सरकार' , Apple से आया अलर्ट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 31, 2023, 02:06 PM IST

Opposition leaders phone Hacking: कई विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि उनका फोन हैक किया जा रहा है और फोन हैकिंग का अलर्ट उन्हें फोन और ईमेल पर Apple की ओर से आया है। दावा किया गया है कि एपल की ओर से आए अलर्ट में कहा गया है कि सरकार उनका फोन हैक करने की कोशिश कर ही है।

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कई नेताओं ने किया फोन हैक होने का दावा

Opposition leaders phone Hacking: देश में एक बार फिर से मोबाइल फोन हैकिंग का भूत निकलकर सामने आया आ गया है। विपक्षी नेताओं- महुआ मोइत्रा, प्रियंका चतुर्वेदी, शशि थरूर, पवन खेड़ा, राघव चड्ढा समेत कई ने दावा किया है कि उनका फोन हैक किया जा रहा है और फोन हैकिंग का अलर्ट उन्हें फोन और ईमेल पर Apple की ओर से आया है। दावा किया गया है कि एपल की ओर से आए अलर्ट में कहा गया है कि सरकार उनका फोन हैक करने की कोशिश कर ही है।

वहीं मोबाइल कंपनी Apple के सूत्रों की ओर से कहा गया है कि एल्गोरिथम की खराबी के कारण उनके ग्राहकों के पास मेल और मैसेजे के माध्यम से अलर्ट आए हैं। Apple इस संबंध में बयान भी जारी किया है। इसमें कहा गया है कि इस बारे में जानकारी नहीं दे सकते कि किस वजह से खतरे की चेतावनी दी जाती है क्योंकि इससे राज्य प्रायोजित हमलावरों को बचने में मदद मिल सकती है। बयान में आगे कहा गया है कि हमलावर आर्थिक व तकनीकी रूप से प्रभावशाली हैं, अकसर हमलों का पूर्ण तरीके से पता नहीं लग पाता। खतरे की चेतावनी के लिए किसी विशिष्ट राज्य-प्रायोजित हमलावर को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते।

सबसे पहले महुआ मोइत्रा ने किया दावा

फोन हैकिंग का दावा सबसे पहले कैश फॉर क्वैरी में फंसी टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की ओर से किया गया। उन्होंने Apple की ओर से आए अलर्ट का स्क्रीन शॉट शेयर करते हुए मोदी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। महुआ ने लिखा, Apple से मुझे अलर्ट और ईमेल मिला है कि सरकार मेरे फोन को हैक करने की कोशिश कर रही है। महुआ मोइत्रा के इस दावे के बाद अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इसी तरह का स्क्रीन शॅाट शेयर किया। स्क्रीन शॉट शेयर कने वालों में कांग्रेस सांसद शशि थरूर, पवन खेड़ा, शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी रहे। वहीं, राघव चड्ढा, अखिलेश यादव, सीताराम येचुरी, असदुद्दीन ओवैसी ने भी इसी तरह के अलर्ट मिलने का दावा किया।

अडाणी मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश- राहुल गांधी

फोन हैकिंग का मामला सामने आने के बाद राहुल गांधी ने दावा किया कि उनकी पार्टी और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के आईफोन से सरकार प्रायोजित हैकर्स द्वारा छेड़छाड़ का प्रयास किया गया है और यह सब अडाणी मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में यह दावा भी किया कि गौतम अडाणी देश में नंबर एक हैं और इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नंबर आता है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब भी अडाणी से जुड़ा मामला उठाया जाता है तो एजेंसियों को जासूसी में लगा दिया जाता है। उन्होंने एक पुरानी कहानी का उल्लेख करते हुए कहा, नरेन्द्र मोदी जी की आत्मा अडाणी में है, तोता कहीं बैठा है, राजा कहीं और बैठा हुआ है। हकीकत यह है कि सत्ता अडाणी जी के हाथ में हैं।

भाजपा ने क्या कहा?

भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को कहा कि कुछ विपक्षी नेताओं समेत कई लोगों के आईफोन पर भेजे गए राज्य प्रायोजित हमलावर संबंधी अलर्ट पर स्पष्टीकरण एप्पल को देना है। पार्टी ने इस सिलसिले में सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों को बेबुनियाद और गलत बताया। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार के खिलाफ आरोप लगाने के बजाय इन नेताओं को एप्पल के समक्ष मामला उठाना चाहिए और प्राथमिकी दर्ज करानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने अपने अनुभव का हवाला देते हुए दावा किया कि कोई भी टेलीफोन कंपनी ऐसा कुछ नहीं करती है और मामले को देखने के लिए सबसे पहले एक आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम सीईआरटी-इन के पास जाती है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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