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मुलायम सिंह यादव की बहू को योगी सरकार ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, तो क्या नाराज हैं अपर्णा यादव

Uttar Pradesh News: अपर्णा यादव ने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष के तौर पर कार्यभार संभाल लिया है। सवाल ये है कि मुलायम सिंह यादव की छोटी बहु क्या सचमुच भाजपा से नाराज है। या फिर उन्हें ये जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी नाराजगी थोड़ी कम हुई है। आपको बताते हैं कि अपर्णा ने खुद क्या रिएक्शन दिया है।

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अपर्णा यादव और डिंपल यादव।

BJP vs SP: समाजवादी पार्टी (सपा) संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता अपर्णा यादव ने बुधवार को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष के तौर पर पदभार संभाल लिया। उन्होंने ‘भाजपा परिवार’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना 'परशुराम' और खुद की तुलना ‘एकलव्य’ से करते हुए कहा कि प्रतिभाशाली होने के बावजूद उन्हें अवसर नहीं दिया जा रहा था। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब वह ‘अर्जुन’ की तरह काम करेंगी।

अफवाहों को अपर्णा यादव ने किया खारिज

अपर्णा यादव ने पदभार संभालने के बाद उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया, जिसमें ऐसा कहा जा रहा था कि विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं मिलने या कोई अन्य जिम्मेदारी नहीं मिलने से वह भाजपा से नाराज हैं। यादव ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश सरकार, संगठन और मेरी पार्टी की आभारी हूं कि उन्होंने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी। जो लोग मुझे जानते हैं, वे जानते हैं कि मेरा काम महिलाओं के मुद्दों पर केंद्रित रहा है, चाहे वह निर्भया मामले या हाल ही में कोलकाता के मामले में विरोध प्रदर्शन करना हो।”

क्या टिकट न मिलने पर भाजपा से नाराज है?

अपर्णा यादव ने कहा, “मैं भगवान से मुझे शक्ति देने के लिए प्रार्थना करती हूं ताकि मैं पूरी ताकत के साथ अपना काम जारी रख सकूं। मैंने समाज सेवा से शुरुआत की और अब मैं राजनीति में हूं, वरिष्ठों और बुजुर्गों के आशीर्वाद से मुझे उम्मीद है कि मैं अच्छा काम करना जारी रखूंगी।” यह पूछे जाने पर कि क्या वह 2022 में विधानसभा चुनाव का टिकट न मिलने पर भाजपा से नाराज हैं तो उन्होंने कहा, “जब आप एक परिवार में होते हैं, तो सभी को अपनी बात रखने का अधिकार होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि कोई परेशान या नाराज है।”

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “भाजपा एक बहुत बड़ा परिवार है, जिसमें प्रधानमंत्री ‘परशुराम जी’ की तरह हैं। शुरू में मुझे लगा कि मैं ‘एकलव्य’ हूं, मुझे कोई जिम्मेदारी नहीं मिल रही है। अब मुझे यह जिम्मेदारी मिली है तो मुझे लगता है कि मैं ‘अर्जुन’ की तरह काम करूंगी। मैं प्रधानमंत्री की आभारी हूं।”

क्या बोलीं भाजपा नेता अपर्णा यादव?

मुलायम की बहू ने कहा, “आयोग कानूनी प्रावधानों और कानूनों के तहत महिलाओं के लिए स्थिति बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मैं उनकी (महिलाओं की) आवाज बन सकती हूं और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने की दिशा में काम कर सकती हूं।” अपर्णा यादव को पिछले हफ्ते उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। सोमवार शाम को उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और इन अफवाहों पर विराम लगा दिया कि वह फिर से सपा में शामिल होंगी। प्रमुख सचिव लीना जौहरी द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पिछले सप्ताह बबीता चौहान को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष नामित किया था और अपर्णा यादव व चारू चौधरी को एक वर्ष की अवधि या राज्य सरकार के निर्णय तक उपाध्यक्ष बनाया गया था।

जब अपर्णा यादव ने सपा से तोड़ा था नाता

अपर्णा यादव सपा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू हैं। वह अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव की पत्नी हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में डिप्लोमाधारक अपर्णा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर लखनऊ कैंट सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अपर्णा 2017 के चुनाव में भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी से हार गई थीं। वह जनवरी 2022 में भाजपा में शामिल हुई थीं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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