Anti Drone System : हर बार मुंह की खानी के बाद भी पाकिस्तान अपनी करतूतों से बाज नहीं आता है। भारत में अशांति, हिंसा एवं दहशतगर्दी फैलाने के लिए वह लगातार कुचक्र रचता आया है। सेना के ऑपरेशन 'ऑल आउट' ने तंकवादी संगठनों की कमर तोड़ दी। आतंकी संगठनों के बड़े कमांडरों के मारे जाने के बाद घाटी में दहशत एवं आतंक फैलाने के पाकिस्तान के मंसूबे नाकाम हो गए। कश्मीर का माहौल बदल चुका है। विकास कार्यों ने लोगों को मुख्य धारा से जोड़ा है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद राज्य में रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आ रहे हैं। नियंत्रण रेखा (LoC) पर सुरक्षाबलों की मुस्तैदी से उसके पाले हुए आतंकवादी भारतीय सीमा में दाखिल नहीं हो पा रहे हैं।
चार महीने में 20 ड्रोन मार गिराए
अपने नापाक मंसूबों में असफल होने के बाद वह सीमा पार से नए तरीके से साजिश रचने लगा। वह ड्रोन के जरिए पंजाब एवं जम्मू सीमा पर हथियार एवं नशीला पदार्थ गिराने लगा। ड्रोन के बढ़ते खतरों को देखते हुए सेना भी सतर्क हुई और उसने सीमा पर एंटी ड्रोन जैमर की तैनाती शुरू की। सीमा पर यह एंटी ड्रोन सिस्टम काफी कारगर साबित हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार बीते चार माह यानी जनवरी से अप्रैल तक सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने 20 ड्रोन को मार गिराया है। इस दौरान 50 किलो हेरोईन भी पकड़ी गई।
यूएवी के संचार तंत्र को हाईजैक कर लेता है
एंटी ड्रोन सिस्टम का ही कमाल है कि पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन अब सीमा में दाखिल नहीं हो पा रहे हैं। यदि वे किसी तरह दाखिल भी हो रहे हैं तो सुरक्षा बलों की नजर से उनका बचना मुश्किल हो गया है। एंट्री ड्रोन का स्पूफर सिस्टम घुसपैठ करने वाले ड्रोन को गलत संदेश भेजता है और उसके संचार तंत्र को हाईजैक कर लेता है। जबकि जैमर ड्रोन को चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रेडियो फ्रिक्वेंसी को जाम कर देता है।
बीते साल सीमा पर देखे गए 300 ड्रोन
एंटी ड्रोन की इन दोनों खूबियों से यूएवी को मार गिराने में मदद मिल रही है। ऐसा देखने में आया है कि आतंकवादी सीमा पार से हथियारों एवं नशीले पदार्थों की तस्करी करने के लिए ड्रोन का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। साल 2022 की अगर बात करें तो राजस्थान लेकर पंजाब और जम्मू सीमा पर करीब 300 ड्रोन देखे गए। यह संख्या 2021 के मुकाबले तीन गुनी है। एंटी ड्रोन सिस्टम लगने के बाद नशे की तस्करी पर रोक लगाने में काफी हद तक सफलता मिली है।
ज्यादातर चीन निर्मित हैं ये ड्रोन
रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान सीमा पर जो एंटी ड्रोन सिस्टम लगे हैं उनकी रेंज करीब 10 किलोमीटर बताई जाती है। इनमें लगे रडार आने वाले यूएवी को दूर से ही पकड़ लेते हैं। पाकिस्तान की तरफ से आने वाले ज्यादातर ड्रोन चीन निर्मित हैं। आम यूएवी की तरह इनमें भी दो लिंक होता है। एक लिंक ड्रोन को जीपीएस के लिए सैटेलाइट से और दूसरा लिंक इन्हें सीमा पार बैठे आतंकवादियों से जोड़ता है।
ड्रोन को मार गिराने के लिए सेना पूरी तरह से तैयार
बीते तीन वर्षों में यह भी देखने में आया है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा सियालकोट सेक्टर में ड्रोन के जरिए विस्फोटक एवं हथियार गिराते रहे हैं। हालांकि, पीर पंजाल के उत्तर में ड्रोन की गतिविधियां कम देखने को मिली हैं। पाकिस्तान की ओर से होने वाली इन हरकतों का जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने पूरी तैयारी की है। सेना की योजना आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में एंटी ड्रोन सिस्टम खरीदने की है। ये सिस्टम केवल नशीले पदार्थों की तस्करी ही नहीं रोकेंगे बल्कि इनका इस्तेमाल जवाब कार्रवाई करने में भी हो सकता है।
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