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'अमनोल बिश्नोई ही था बाबा सिद्दीकी हत्याकांड का मास्टरमाइंड...' मुंबई पुलिस ने अदालत को बताया

Baba Siddiqui Murder Case: मुंबई पुलिस ने अदालत को बताया कि बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच के दौरान अनमोल का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया है। पुलिस ने बताया कि वह अन्य आरोपियों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा था। उसने अदालत से कहा कि यह पैसा कहां से आ रहा था और इसके इस्तेमाल का पता लगाने के लिए जांच करने की जरुरत है।

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बाबा सिद्दीकी हत्या मामला।

Baba Siddiqui Murder Case: बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में मुंबई पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने मुंबई की एक विशेष अदालत को बताया कि बाबा सिद्दीकी की 12 नवंबर को हुई हत्या के मामले में जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया है। पुलिस ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के प्रावधानों का हवाला देते हुए सिद्दीकी की हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों की हिरासत मांगते हुए अनमोल बिश्नोई की संलिप्ता का दावा किया।

विशेष मकोका अदालत के. न्यायाधीश ए. एम. पाटिल ने मुख्य हमलावर शिवकुमार गौतम समेत आठ आरोपियों को सात दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। मुंबई पुलिस ने अदालत को बताया कि बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच के दौरान अनमोल का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया है। पुलिस ने बताया कि वह अन्य आरोपियों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा था। उसने अदालत से कहा कि यह पैसा कहां से आ रहा था और इसके इस्तेमाल का पता लगाने के लिए जांच करने की जरुरत है।

ऐप के जरिए संर्पक में था अनमोल बिश्नोई

पुलिस ने अदालत को बताया कि अनमोल ने एक संचार ऐप के जरिए सह-आरोपी से संपर्क किया था। पुलिस ने कहा कि इस पहलू पर और जानकारी जुटाने के लिए उन्हें गिरफ्तार आरोपी की हिरासत की जरूरत है। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने 12 अक्टूबर को सिद्दीकी की हत्या के सिलसिले में कथित मुख्य हमलावर शिवकुमार गौतम सहित अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पहले मजिस्ट्रेट अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। पुलिस ने 30 नवंबर को इन सभी आरोपियों के खिलाफ मकोका की कड़ी धाराएं लगाईं, जिसके बाद उन्हें मंगलवार को विशेष अदालत में पेश किया गया था। पुलिस ने मामले की गहन जांच के लिए गौतम समेत आठ आरोपियों की हिरासत की मांग की थी, जिसे विशेष न्यायाधीश ने सात दिसंबर तक के लिए मंजूर कर दिया।

आरोपियों ने की मकोका हटाने की मांग

आरोपियों की पैरवी करने वाले वकील रूपेश जायसवाल, अजिंक्य मिर्गल और दिलीप शुक्ला ने हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पहले ही 40 दिनों से अधिक समय से हिरासत में हैं। वकील ने दलील दी कि आरोपियों के खिलाफ मकोका के प्रावधान नहीं बनते क्योंकि उनके खिलाफ पहले कोई मामला दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह दर्शाता हो कि ये आरोपी उस गिरोह का हिस्सा हैं, जिसके खिलाफ दो आरोप-पत्र (मकोका लगाने के लिए एक आवश्यक शर्त) दाखिल किए गए हैं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आठ आरोपियों को सात दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। शेष आरोपियों को विशेष अदालत ने 14 दिन की हिरासत में भेजा है। जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भाई अनमोल बिश्नोई और शुभम लोनकर इस मामले में वांछित आरोपी हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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