आंध्र प्रदेश सरकार ने मंगलवार को तिरुपति मंदिर के लड्डू में कथित मिलावट के मामले में असली साजिशकर्ता की पहचान के लिए एक नई कमेटी गठित करने का निर्णय लिया। यह फैसला मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया। बैठक के बाद वित्त मंत्री पय्यावुला केशव ने मीडिया को बताया कि कैबिनेट ने इस मामले की जांच कर चुकी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की गहराई से समीक्षा करने और मास्टरमाइंड का पता लगाने के उद्देश्य से एक अल्पकालिक प्रशासनिक समिति बनाई जाएगी। सरकार ने साफ किया कि पवित्र लड्डू निर्माण में उपयोग किए जाने वाले घी में मिलावट को बेहद गंभीरता से लिया गया है और रिपोर्ट में जिन लोगों को दोषी ठहराया गया है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
घी में मिलावट के मुद्दे पर विचार-विमर्श
मंत्री ने बताया कि कैबिनेट ने करीब तीन घंटे तक घी में मिलावट के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) की पवित्रता और विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, सीबीआई की निगरानी में एसआईटी ने इस मामले की जांच की थी। जांच एजेंसी की ओर से राज्य सरकार को दो दस्तावेज सौंपे गए हैं—एक पहले से अदालत में दाखिल चार्जशीट और दूसरी 11 पन्नों की एक गोपनीय रिपोर्ट। चार्जशीट अदालत द्वारा औपचारिक संज्ञान लिए जाने के बाद ही सरकार और संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाएगी।
एसआईटी रिपोर्ट में क्या सामने आया?
एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, घी की आपूर्ति प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इनमें टेंडर नियमों में अनावश्यक ढील, गुणवत्ता से समझौता और फर्जी दस्तावेज जमा करना शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019 के बाद टीटीडी द्वारा घी खरीद प्रक्रिया में किए गए बदलावों के कारण घटिया गुणवत्ता वाला घी सप्लाई हुआ। टेंडर की शर्तों में टर्नओवर की सीमा को 250 करोड़ रुपये से घटाकर 150 करोड़ रुपये करना और दूध खरीद के न्यूनतम अनुभव की अनिवार्यता हटाना जानबूझकर किया गया कदम बताया गया है।
संदिग्ध मिलावट पाए जाने की पुष्टि
एनडीडीबी-सीएएलएफ लैब की जांच रिपोर्ट में घी के नमूनों में सोयाबीन, सूरजमुखी, रेपसीड, कॉटनसीड, मछली का तेल, बीफ टैलो और लार्ड जैसी संदिग्ध मिलावट पाए जाने की पुष्टि हुई। इसी रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सार्वजनिक मंच से इस मुद्दे को उठाया था। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वर्ष 2022 में सीएफटीआरआई लैब द्वारा जारी चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, जिसके चलते लगभग 58 लाख लीटर मिलावटी घी की आपूर्ति हुई। साथ ही, कुछ कंपनियों द्वारा टेंडर में पात्रता हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज जमा करने की बात भी उजागर हुई।
वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल
एसआईटी की रिपोर्ट में टीटीडी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ए.वी. धर्मारेड्डी (एईओ), अनिल कुमार सिंघल (पूर्व ईओ) और ओ. बालाजी (एफ एंड सीएओ) के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये अधिकारी टेंडर शर्तों में ढील देने और गुणवत्ता नियंत्रण में लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए गए। कैबिनेट ने निर्णय लिया कि इन सभी के खिलाफ उचित कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संस्थागत सुधार और मजबूत गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था लागू की जाएगी।
मुद्दे को राजनीतिक रूप देने की कोशिश
सूचना, जनसंपर्क एवं आवास मंत्री कोलुसु पार्थसारथी ने बताया कि कैबिनेट ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा के लिए पहले से निर्धारित एजेंडा को स्थगित कर दिया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बैठक में एसआईटी की रिपोर्ट प्रस्तुत की। वहीं, नागरिक आपूर्ति मंत्री नादेंदला मनोहर ने कहा कि उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण सहित सभी मंत्रियों ने इस विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, जिसकी सरकार निंदा करती है, और जनता के सामने सच्चाई रखने के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ कदम उठा रही है।
(इनपुट - आईएएनएस)
