'सनातन मूल्यों का अपमान करने वालों की सत्ता में वापसी नामुमकिन'; शाह बोले- संतों के आशीर्वाद से ही मिलती है गद्दी
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 27, 2026, 09:12 PM IST
अमित शाह ने स्वामीनारायण संप्रदाय के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक सनातन परंपराओं के अनुयायी ऐसी सरकार की प्रतीक्षा करते रहे,जो सनातन धर्म को उसका उचित सम्मान दे और उसके सिद्धांतों के अनुरूप शासन करे। मुझे पूरा विश्वास है कि संतों के आशीर्वाद से ऐसी सरकार, जो सनातन धर्म के अनुयायियों को निराश करे इस देश में फिर कभी नहीं आएगी।
अमित शाह
यूपी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर मचे घमासान के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी सनातन धर्म को लेकर एक बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने गुजरात में एक'सनातन मूल्यों का अपमान करने वालों की सत्ता में वापसी नामुमकिन'; शाह बोले- संतों के आशीर्वाद से ही मिलती है गद्दीकार्यक्रम में बोलते हुए सनातन का अपमान करने वालों को खुली चुनौती दी। शाह ने कहा कि जो सरकार सनातन धर्म का अपमान या उसे मानने वालों को निराश करती है वह दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकती, केवल संतों के आशीर्वाद से ही देश में सत्ता मिलती है। अमित शाह ने यह बातें गांधीनगर में स्वामीनारायण संप्रदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं। शाह ने अपने बयान में किसी राजनेता या दल का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
गांधीनगर में स्वामीनारायण संप्रदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक सनातन परंपराओं के अनुयायी ऐसी सरकार की प्रतीक्षा करते रहे,जो सनातन धर्म को उसका उचित सम्मान दे और उसके सिद्धांतों के अनुरूप शासन करे। मुझे पूरा विश्वास है कि संतों के आशीर्वाद से ऐसी सरकार, जो सनातन धर्म के अनुयायियों को निराश करे इस देश में फिर कभी नहीं आएगी।
पीएम मोदी की भी की तारीफ
गृह मंत्री ने इस मौके पर पीएम मोदी की भी खूब प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गुजरात के सपूत नरेंद्र मोदी पिछले 11 वर्षों से देश का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 550 साल पहले ध्वस्त किए गए भगवान राम के मंदिर का निर्माण हुआ,जिससे सदियों से प्रतीक्षा कर रहे लोगों की आकांक्षा पूरी हुई।
मोदी सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं
इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने मोदी सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने कहा कि बीते 11 वर्षों में मोदी सरकार के फैसलों और पहलों से भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति उसकी प्रतिबद्धता साफ झलकती है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में अनुच्छेद 370 हटाया गया,तीन तलाक समाप्त किया गया और सभी धर्मों के लिए समान नागरिक संहिता की दिशा में पहल की गई। प्राचीन परंपराओं को पुनर्जीवित करने और समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के लिए भी लगातार प्रयास किए गए हैं। योग,आयुर्वेद,गौ-रक्षा के साथ-साथ बदरीनाथ,केदारनाथ,काशी विश्वनाथ और अब सोमनाथ जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के पुनरुद्धार का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
अमित शाह ने भगवान स्वामीनारायण के योगदान को याद करते हुए कहा कि ब्रिटिश काल में उन्होंने समाज को दिशा दी। उन्होंने कहा कि भगवान स्वामीनारायण पैदल यात्रा करते हुए पूरे भारत में घूमे और उस समय समाज में फैली कुरीतियों और व्यसनों के खिलाफ सुधार का कार्य किया।
भगवान स्वामीनारायण द्वार रचित शिक्षापत्री के महत्व को भी बताया
शिक्षापत्री के महत्व को बताते हुए शाह ने कहा कि यह ग्रंथ प्रमुख हिंदू शास्त्रों के सार को समेटे हुए है। उन्होंने इसे 'जीवन के लिए नैतिक संविधान' बताते हुए कहा कि यह आत्मसंयम,सामाजिक आचरण,करुणा,अहिंसा और कर्तव्यबोध की व्यावहारिक सीख देता है। साथ ही,यह वित्तीय लेन-देन और व्यक्तिगत आचरण में पारदर्शिता पर इसका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
बता दें कि यह कार्यक्रम भगवान स्वामीनारायण द्वारा 1826 में रचित पवित्र ग्रंथ ‘शिक्षापत्री’ के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। 212 संस्कृत श्लोकों वाला यह ग्रंथ स्वामीनारायण संप्रदाय के अनुयायियों के लिए नैतिक,सामाजिक और आध्यात्मिक आचरण का आधार माना जाता है। इसमें अहिंसा, शुद्धता,आहार और दैनिक कर्तव्यों पर विशेष जोर दिया गया है।
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