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यूपी में बैन, बिहार में उठी मांग...क्या पूरे देश के अंदर हलाल प्रोडक्ट पर लगेगा प्रतिबंध? अमित शाह ने दिया बड़ा बयान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 25, 2023, 03:43 PM IST

Halal Certification Ban in India: अमित शाह ने शनिवार को तेलंगाना में एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हलाल पर प्रतिबंध लगाने का अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

Photo : ANI

Halal Certification Ban in India: उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफाइड उत्पादों की बिक्री पर बैन लगा दिया गया है। इसके बाद बिहार में भी इस पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग उठ रही है। बीते दिनों केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर हलाल प्रमाणित उत्पादों की बिक्री पर बैन लगाए जाने की मांग की थी। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है और केंद्र सरकार भी इस पर बैन लगा सकती है।

हालांकि, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हलाल उत्पादों पर प्रतिबंध के सवालों पर सरकार का रुख साफ किया है। अमित शाह ने शनिवार को तेलंगाना में एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हलाल पर प्रतिबंध लगाने का अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। यह बात शाह ने तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान कही।

बीआरएस सरकार पर साधा निशाना

इस दौरान अमित शाह ने तेलंगाना में मुख्यमंत्री केसीआर के नेतृत्व वाली बीआरएस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, राज्य सरकार ने पिछले 10 सालों में केवल भ्रष्टाचार किया है और लोगों के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। आज युवा, किसान, दलित और पिछड़े वर्ग के लोग पूरी तरह निराश हैं। राज्य के लोगों को मानना है कि बीआरएस ने भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं किया। बता दें, तेलंगाना में 30 नवंबर को मतदान होना है।

क्या है हलाल बैन का मुद्दा?

बता दें, बीते 18 नवंबर को उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की सीमा के अंदर सभी हलाल-सर्टिफाइड प्रोडकट्स के उत्पादन, स्टोरेज, वितरण और बिक्री पर रोक लगा दी थी। यह रोक हलाल प्रोडक्ट के खिलाफ एक एफआईआर के बाद लगाई गई थी। आशंका जताई गई कि हलाल प्रोडक्ट के जरिए देश विरोधी गतिविधियों के लिए फंडिंग की जा रही थी। उधर, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी हलाल प्रोडक्ट को लेकर जांच किए जाने की मांग की है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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