Protest Over justice Varma Transfer : जस्टिस यशवंत वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट में किए जाने के खिलाफ बार एसोसिएशन सड़कों पर उतर आया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के इस ट्रांसफर फैसले के खिलाफ वह मंगलवार से बेमियादी हड़ताल कर रहा है। वकील हाईकोर्ट के गेट नंबर 3 पर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर रहे हैं। अधिवक्ताओं ने कहा है कि वे पूरी तरह से न्यायिक कामकाज का बहिष्कार करेंगे। बार एसोसिएशन की ओर से हाईकोर्ट के गेट नंबर 3 पर टेंट भी लगा दिया गया है।
हमारी नहीं किसी जज के खिलाफ नहीं, सिस्टम से है-अनिल तिवारी
इस बेमियादी अनशन पर अनिल तिवारी ने कहा कि हमारी लड़ाई किसी जज के खिलाफ नहीं बल्कि सिस्टम से है। यहां कड़ी मेहनत करने वाले न्यायाधीश हैं लेकिन अब उनकी छवि धूमिल हो सकती है। उन्होंने कहा, 'इलाहाबाद हाई कोर्ट का इस्तेमाल डंपिंग ग्राउंड के रूप में किया जा रहा है। यदि भ्रष्टाचार की वजह से एक जज का ट्रांसफर हो रहा है तो उसे इलाहाबाद एचसी में भेजा जा रहा है। सुप्री कोर्ट को इलाहबाद एचसी की दशा के बारे में जानकारी है। खामी, दोष को ठीक करने की जगह यदि आप दागी लोगों को यहां भेजते रहेंगे सिस्टम बैठ जाएगा।'
'जस्टिस वर्मा को कतई कार्यभार नहीं ग्रहण करने देंगे'
बार एसोसिएशन ने सोमवार देर शाम कार्यकारिणी की इमरजेंसी बैठक में हड़ताल पर जाने का ऐलान किया था। हाईकोर्ट बार के पदाधिकारियों का कहना है कि जस्टिस वर्मा को वह यहां कतई कार्यभार नहीं ग्रहण करने देंगे। पूर्ण रूप से हड़ताल पर रहने के अलावा वे सड़कों पर भी आंदोलन करेंगे। बार एसोसिएशन ने सीजेआई से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। बुधवार 26 मार्च से हाईकोर्ट का फोटो आइडेंटिफिकेशन सेंटर भी अनिश्चित काल के लिए बंद हो जाएगा। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वकील अनिल तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में हड़ताल पर जाने का फैसला लिया गया।
आर-पार की लड़ाई के मूड में एसोसिएशन
एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा है कि उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में है। उन्होंने सोमवार को आरोप लगाया था, 'इस मामले में शुरू से लीपापोती की जा रही है। यह लड़ाई आज हिंदुस्तान में वकील लड़ रहा है। अगले प्रस्ताव तक अधिवक्ता काम नहीं करेंगे और हम किसी भी तरह के परिणाम भुगतने को तैयार हैं।'
जस्टिस वर्मा के आवास से भारी मात्रा में नकदी की कथित बरामदगी
इससे पहले, अपने सरकारी आवास से भारी मात्रा में नकदी की कथित बरामदगी के मामले से घिरे न्यायमूर्ति वर्मा से सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने कामकाज वापस ले लिया था। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किये गये एक प्रस्ताव में न्यायमूर्ति वर्मा का तबादला करने की केंद्र से की गयी सिफारिश सार्वजनिक की गयी। प्रस्ताव में कहा गया है, ‘उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने 20 और 24 मार्च, 2025 को आयोजित बैठकों में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वापस भेजने की सिफारिश की है।’
