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Manipur Violence पर सर्वदलीय बैठक, अमित शाह ने शांति बहाली के लिए कांग्रेस समेत कई पार्टी के नेताओं के साथ की चर्चा

  • Authored by: रामानुज सिंह
  • Updated Jun 24, 2023, 08:28 PM IST

All party Meet on Manipur Violence: मणिपुर में मेइती और कुकी समुदायों के बीच पिछले महीने तीन मई के बाद से भड़की हिंसा में अब तक करीब 120 लोगों की मौत हो चुकी है। मणिपुर में मौजूदा स्थिति पर चर्चा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। कई पार्टी के नेता इसमें शामिल हुए।

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मणिपुर हिंसा पर सर्वदलीय बैठक (तस्वीर-PTI)

All party Meet on Manipur Violence: मणिपुर की मौजूदा स्थिति पर चर्चा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में सर्वदलीय बैठक की। हिंसाग्रस्त राज्य की स्थिति का जायजा लेने के लिए अमित शाह ने बैठक बुलाई थी। इस सर्वदलीय बैठक में बीजेपी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामदलों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भाग लिया और राज्य में शांति बहाली को लेकर चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने मणिपुर पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर इस पूर्वोत्तर राज्य में शांति बहाल करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। संबित पात्रा ने कहा कि हिंसा शुरू होने के बाद से एक भी दिन ऐसा नहीं गया जब उन्होंने स्थिति पर प्रधानमंत्री मोदी से बात नहीं की हो या प्रधानमंत्री ने निर्देश नहीं दिये हों।

संबित पात्रा ने कहा कि सदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने अपने प्रतिनिधि भेजे थे। सभी राजनीतिक दलों ने अपने विषयों को सकारात्मक तरीके से रखा। सभी प्रतिनिधियों को सुनने के बाद गृह मंत्री ने विपक्षी दलों के सुझावों पर चर्चा करने का आश्वासन दिया है। सभी राजनीतिक दलों के मौजूद प्रतिनिधि मंडल ने भी माना कि आज से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई गृह मंत्री 3 दिन दंगे वाली जगह बिताकर आया हो।

सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा....

मणिपुर पर हुई सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि 2001 में जून के महीने में जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तब मणिपुर जल रहा था। उसके बाद मणिपुर अमन, शांति और विकास के रास्ते पर लौट आया उसका प्रमुख कराण है कि ओकरम इबोबी सिंह(मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री) ने 15 साल वहां स्थिर सरकार दी। 3 मई से हम मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री इसपर कुछ बोलें। बेहतर होता कि सर्वदलीय बैठक इंफाल में होती जिससे एक संदेश जाता कि मणिपुर की पीड़ा देश की पीड़ा है। वहां अलग-अलग मिलिटेंट ग्रुप हैं जिनके पास हथियार हैं। हमारी मांग है कि बिना किसी भेदभाव के सारे मिलिटेंट ग्रुप से हथियार वापस लिए जाएं। जब तक एन. बीरेन सिंह मुख्यमंत्री रहेंगे तब तक मणिपुर में परिवर्तन की संभावना नहीं है, उनसे इस्तीफा लेना चाहिए। मुख्यमंत्री ने खुद स्वीकारा है कि मैं स्थिति को संभाल नहीं पाया, ऐसे हालात में उनका मुख्यमंत्री रहना नामुमकिन है

सर्वदलीय बैठक के बाद RJD सांसद मनोज झा ने कहा...

मणिपुर पर हुई सर्वदलीय बैठक के बाद RJD सांसद मनोज झा ने कहा कि खुले मन से बात हुई हम सबने अपनी राय रखी। वहां की राजनीतिक नेतृत्व में (लोगों का) अविश्वास है और यह बात सारे विपक्षी दलों ने रखी। हमने कहा कि जो इंसान प्रशासन चला रहा है उसमें कोई विश्वास नहीं है। अगर आपको शांति बहाल करनी है तो आप ऐसे व्यक्ति के रहते नहीं कर सकते।

सर्वदलीय बैठक पर DMK सांसद तिरुचि शिवा ने कहा...

मणिपुर पर हुई सर्वदलीय बैठक पर DMK सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि हमने मणिपुर को लेकर अपनी चिंताएं रखी हैं। 100 लोग मारे गए हैं और करीब 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं। इस पर सबसे दुखद यह है कि प्रधानमंत्री ने इस पर एक शब्द तक नहीं कहा। वहां की स्थिति का अच्छे से पता लगाने के लिए एक सर्वदलीय दल को मणिपुर भेजना चाहिए। गृह मंत्री ने हमें आश्वासन दिया है।

इन पार्टियों के नेता बैठक में हुए शामिल

बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता ओकराम इबोबी सिंह (कांग्रेस), तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन, मेघालय के मुख्यमंत्री एवं नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के नेता कोनराड संगमा, शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) नेता एम. थंबी दुरई, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता तिरुचि शिवा, बीजू जनता दल (बीजद) के नेता पिनाकी मिश्रा, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता मनोज झा शामिल हुए। बैठक में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, नित्यानंद राय और अजय कुमार मिश्रा, केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला और खुफिया ब्यूरो के निदेशक तपन डेका भी शामिल हुए।

अमित शाह ने किया था मणिपुर का दौरा

अमित शाह ने मई की शुरुआत में हिंसाग्रस्त राज्य की अपनी 4 दिवसीय यात्रा के दौरान शांति की अपील की थी और उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। मणिपुर में इस मुद्दे पर विपक्ष ने बीजेपी को आड़े हाथ लेते हुए बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दल स्थिति से निपटने के तरीके को लेकर सरकार की आलोचना कर रहे हैं क्योंकि 50 दिन के बाद भी हिंसा नहीं रुकी है।

चार मई से जल रहा है मणिपुर

चूंकि मणिपुर में 3 मई के बाद से अभी भी आगजनी जैसी घटनाएं हो रही हैं, इसलिए राज्य सरकार ने अशांति को रोकने के प्रयास में इंटरनेट पर प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से 5 दिन और 25 जून तक बढ़ा दिया है। राज्य में जारी अशांति को देखते हुए डेटा सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। मेइती और कुकी समुदाय के बीच हुई हिंसा में करीब 120 लोगों की जान जा चुकी है। तीन हजार से अधिक लोग घायल हो गए हैं।

मणिपुर में इस वजह से भड़की हिंसा

मेइती को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की मांग के विरोध में ऑल ट्राइबल्स स्टूडेंट्स यूनियन (एटीएसयू) द्वारा आयोजित एक रैली के दौरान झड़प के बाद 3 मई को मणिपुर में हिंसा भड़क उठी। यह ट्रिगर मणिपुर हाईकोर्ट के एक आदेश द्वारा प्रदान किया गया था जिसमें राज्य को मेइती समुदाय को अनुसूचित सूची में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।

देश की अंतरात्मा पर गहरा घाव- कांग्रेस

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि राज्य में शांति और सद्भाव की अपील करते हुए कहा कि मणिपुर में लोगों के जीवन को तबाह करने वाली अभूतपूर्व हिंसा ने हमारे राष्ट्र की अंतरात्मा पर गहरा घाव छोड़ दिया है। बीजेपी शासित राज्य मणिपुर में हिंसा भड़कने के बाद से कांग्रेस मणिपुर पर मुखर है।

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रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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