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यूपी BJP में सब ठीक? CM योगी के पहुंचने से पहले ही मीटिंग से निकल गए दोनों डिप्टी सीएम, केशव बोले- 'सरकार के दम पर नहीं जीते जाते चुनाव'

CM Yogi vs Keshav Prasad Maurya: बीजेपी ओबीसी कार्यसमिति की बैठक में सीएम योगी के अलावा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को भी मौजूद रहना था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीएम योगी के पहुंचने से पहले ही दोनों डिप्टी सीएम वहां से निकल गए, जिसके बाद चर्चाएं और भी ज्यादा तेज हो गई हैं।

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Keshav Prasad Maurya

Photo : Twitter

CM Yogi vs Keshav Prasad Maurya: लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के अंदर चल रही रार धीरे-धीरे सबके सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इशारो ही इशारों में एक-दूसरे के खिलाफ तंज कर रहे हैं। पार्टी आलाकमान भले ही सबकुछ ठीक होने का दावा कर रहा हो, लेकिन यूपी से दिल्ली तक मची भागदौड़ कुछ और ही इशारा कर रही है। अब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर से अपने तेवर दिखाए हैं।

बीजेपी की ओबीसी कार्यसमिति की बैठक में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि केवल सरकार के बल पर चुनाव नहीं जीते जाते, पार्टी ही चुनाव लड़ती है और पार्टी ही चुनाव जीतती है। उन्होंने यह भी कहा कि हम अति आत्मविश्वास की वजह से हारे। केशव प्रसाद मौर्य के इस बयान के बाद चर्चा है कि उनका इशारा सीएम योगी की ओर है।

योगी के पहुंचने से पहले ही निकल गए दोनों डिप्टी सीएम

ओबीसी कार्यसमिति की बैठक में सीएम योगी के अलावा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को भी मौजूद रहना था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीएम योगी के पहुंचने से पहले ही दोनों डिप्टी सीएम वहां से निकल गए, जिसके बाद चर्चाएं और भी ज्यादा तेज हो गई हैं। इस दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने यह भी कहा कि समाज और सरकार एक दूसरे के पूरक हैं। सरकार और संगठन दोनों मिलकर ही सरकार चलाते हैं। बीजेपी सरकार के तमाम मुख्यमंत्रियों को नहीं पता था कि वे (योगी आदित्यनाथ) सीएम बनेंगे।

यूपी में सबकुछ ठीक नहीं?

लोकसभा चुनाव के बाद सीएम योगी और केशव प्रसाद मौर्य के बीच हुई बयानबाजी के बाद से सवाल उठ रहे हैं कि क्या यूपी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। यहां सरकार और संगठन के बीच मतभेद के कयास लगाए जा रहे हैं। यह मुद्दा भी सबसे पहले केशव प्रसाद मौर्य ने ही उठाया था। बीजेपी कार्यसमिति की बैठक में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि संगठन सरकार से बड़ा हेाता है। जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद भी उन्होंने सोशल मीडिया पर भी यह लिखा था। माना जा रहा है कि केशव प्रसाद का इशारा सीएम योगी की तरफ था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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