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हरियाणा विधानसभा का घेराव करेगा किसान संगठन, सैनी सरकार को दी खुली चेतावनी

Kisan Andolan: 'ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन' हरियाणा विधानसभा का घेराव करेगा। नायब सिंह सैनी की सरकार को ये चेतावनी संगठन के नेताओं ने दी है। किसान नेता ने बताया है कि संगठन ने फैसला किया है कि 25 फरवरी को चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

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किसान आंदोलन। (फाइल फोटो)

Farmers Protest: 'ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन' ने रविवार को ऐलान किया है कि वह 25 फरवरी को हरियाणा विधानसभा का घेराव करेगा। संगठन की ओर से बड़ी संख्या में किसान चंडीगढ़ के लिए रवाना होंगे। 'ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन' के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यवान ने बताया कि उनकी मांग किसानों की लागत से डेढ़ गुना एमएसपी दरों पर तमाम फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी के लिए कानून बनाने की है। साथ ही स्मार्ट बिजली मीटर स्कीम पर रोक लगानी चाहिए और गरीबों को पूरे साल काम मिलना चाहिए।

इन मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आक्रोशित हैं किसान

सत्यवान ने कहा, 'हमारी मांग है कि किसानों और खेतीहर मजदूरों को ऋण मुक्त किया जाए और खाद-बीज-कीटनाशक, डीजल समेत कृषि के लिए उपयोगी चीजें सस्ते दामों पर पर्याप्त मात्रा में समय पर उपलब्ध हों। इसके अलावा फसल खराब होने का मुआवजा, आवारा पशुओं की रोकथाम जैसी प्रमुख मांगों को लेकर हम देशव्यापी आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं।'

'25 फरवरी को चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा का घेराव'

उन्होंने बताया कि संगठन ने फैसला किया है कि 25 फरवरी को चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा का घेराव किया जाएगा। साथ ही अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अब कृषि ड्राफ्ट लेकर आ रही है, जिसका संगठन विरोध करेगा।

उन्होंने हरियाणा सरकार की तरफ से 15 दिन में ड्राफ्ट पर सुझाव मांगे जाने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 15 दिनों में सरकार ने सुझाव मांगे थे, जो संभव नहीं है। सरकार कृषि कानूनों को फिर से लागू करना चाहती है, जो हम होने नहीं देंगे। हमने पहले भी तीन काले कानूनों को रद्द कराया था, अब फिर से लड़ेंगे और जीतेंगे भी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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