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'गिरने वाली है सरकार', अखिलेश यादव ने मोदी-योगी को लेकर क्यों कर दिया ये बड़ा दावा

UP Politics: पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी को लेकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कटाक्ष किया है। उन्होंने पीएम मोदी पर इशारों-इशारों में तंज कसते हुए कहा कि जिसने हराया उसे हटा नहीं पा रहे। अखिलेश ने अपने तंज में भाजपा को यूपी में लोकसभा चुनाव में मिली हार का जिक्र किया।

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अखिलेश यादव, पीएम मोदी और सीएम योगी।

Akhilesh Yadav Slams Modi-Yogi: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कथित अंदरूनी खींचतान तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए मंगलवार को कटाक्ष किया कि 'जिसने हराया, उसे हटा नहीं पा रहे हैं।' यादव ने लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 'चलने वाली नहीं, बल्कि गिरने वाली सरकार' है तथा यह ‘साइकिल’ के भरोसे ही चल रही है।

अखिलेश ने क्यों साइकिल का जिक्र करके कसा तंज

साइकिल समाजवादी पार्टी के साथ साथ तेलुगु देसम पार्टी (तेदेपा) का भी चुनाव चिन्ह है। मौजूदा सरकार में तेदेपा मुख्य घटक दल है। सपा प्रमुख ने पिछले दिनों भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की प्रधानमंत्री के साथ बैठक से संबंधित एक वीडियो का हवाला देते हुए तंज कसा, 'जबसे उत्तर प्रदेश में हारे हैं तब से कोई नमस्कार नहीं कर रहा है। वह वीडियो देखा आपने, कोई किसी को नमस्कार नहीं कर रहा है, कोई किसी को देख नहीं रहा है।'

जिसने हराया, उसे हटा नहीं पा रहे हैं आप: अखिलेश

अखिलेश यादव ने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के साथ नोकझोंक के दौरान प्रधानमंत्री का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए सदन में कहा, 'आप अपने आप को ताकतवर कहते थे, लेकिन जिसने (लोकसभा चुनाव में) हराया, उसे हटा नहीं पा रहे हैं।' उन्होंने दावा किया कि केंद्र की सरकार चलने वाली नहीं, बल्कि गिरने वाली सरकार है।

सपा अध्यक्ष ने कटाक्ष किया, 'साइकिल ही आपकी सरकार चलवा रही है। जिस दिन साइकिल हट गई, सरकार कैसे चलाएंगे।' उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का यह 11वां बजट है, लेकिन फिर भी कोई उम्मीद नजर नहीं आती। सपा नेता ने कटाक्ष किया, 'सरकार बनने के बाद जो खुशी दिखाई देनी चहिए थी वह भी दिखाई नहीं दे रही है।' उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में युवाओं, बेरोजगारों और गांवों के लिए कुछ नहीं है तथा महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए कुछ नहीं किया गया है।

नौकरी और रेल हादसे के मुद्दे पर सरकार को घेरा

अखिलेश यादव ने कहा, 'अगर 10 साल में सबकुछ इतना अच्छा हुआ है तो आप भूख सूचकांक में कहां खड़े हैं? आपने ‘मेक इन इंडिया’ का सबसे बड़ा सपना दिखाया। उत्तर प्रदेश को कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं मिला, हमें सिर्फ प्रधानमंत्री जी मिले हैं।' उन्होंने दावा किया कि सपना तो यह भी दिखाया गया था कि अगर निजीकरण हो जाएगा तो नौकरी मिल जाएंगी, लेकिन नौकरियां कम होती चली गईं।

सपा नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम से दिखाई दे रहा है कि इस सरकार ने कितना काम किया है। उन्होंने रेल हादसों का उल्लेख करते हुए ककहा, 'एक और रेल दुर्घटना की खबर सुनी है। जबसे यह सरकार आई है तब से रेल दुर्घटना और पेपर लीक में स्पर्धा चल रही है कि कौन आगे जाएगा।'

क्या किसानों की आय दोगुनी हो गई? अखिलेश का सवाल

अखिलेश यादव ने सवाल किया, 'सरकार कहती थी कि किसानों की आय वह दोगुनी कर देगी। 11 साल हो गए, क्या किसानों की आय दोगुनी हो गई? (सत्तापक्ष के) कई सदस्यों की सुनता हूं कि हम एमएसपी दे रहे हैं। अगर आप एमएसपी दे रहे हैं तो उसकी कानूनी गारंटी भी तो दीजिए।' यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए बड़े-बड़े समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए, लेकिन जमीन पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा है।

उन्होंने ‘अग्निपथ’ योजना को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि जिस दिन सपा केंद्र की सत्ता में आएगी, उस दिन इसे खत्म किया जाएगा। उनका कहना था कि समाजवादियों को यह योजना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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