Delhi Protest: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी है। नेहा बोरा ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये का बॉन्ड भरने और शांति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था। याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा था कि नेहा बोरा की याचिका मेंटेनेबल नहीं है।
कोर्ट में 3 घंटे चली बहस
बीते दिनों न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने नेहा बोरा के वकील और पुलिस की दलीलें लगभग तीन घंटे तक सुनने के बाद, याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था। नेहा बोरा ने गुरुवार को हाई कोर्ट में दलील दी कि नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। बहस के दौरान, बोरा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की मांग करने में कुछ भी गलत नहीं है।
यह दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा की एक दलील के जवाब में कहा गया। शर्मा ने अदालत का ध्यान कुछ सामग्रियों की ओर दिलाया था, जिसमें बोरा की मौजूदगी वाला एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन भी शामिल है, जिसमें सत्ता परिवर्तन को लेकर एक बयान दिया गया था।
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उन्होंने कहा कि संयुक्त बैठक में यह बात कही गई थी कि यह सत्ता परिवर्तन की लड़ाई है और हम सत्ता परिवर्तन करा कर ही रहेंगे। इस पर, शंकरनारायणन ने कहा कि बोरा ने ऐसा नहीं कहा था और लोकतंत्र में, सत्ता परिवर्तन में कुछ भी गलत नहीं है। इस पर एएसजी ने आपत्ति जताते हुए कहा, ''आप उस संवाददाता सम्मेलन का हिस्सा थे। मैं इस बात पर ऐतराज जताता हूं। लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन वोट के जरिए होगा, न कि दिल्ली के बीचोंबीच एकत्र हुए कुछ उपद्रवी तत्वों के जरिए।''
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर भाग लेने वाली बोरा ने (पुलिस के) नोटिस को रद्द किए जाने और पुलिस को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।
