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AIMIM चीफ ने बताया BJP को हराने का फार्मूला...कांग्रेस के सामने रख दी ये शर्त, खुद भी साथ आने को तैयार

AIMIM Chief Asaduddin Owaisi: असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, हमारी पार्टी पर बीजेपी की 'बी टीम' होने का आरोप लगाया जाता था, लेकिन हरियाणा में एआईएमआईएम के उम्मीदवारों को न उतारने के बावजूद मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी कैसे हार गई?

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असदुद्दीन ओवैसी

AIMIM Chief Asaduddin Owaisi: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अकेले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा को नहीं हरा सकती। यदि उन्हें हराना है तो सबसे पुरानी पार्टी को सभी को साथ लेकर चलना होगा। तेलंगाना के विकाराबाद में शुक्रवार की रात एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि वक्फ संशोधन विधेयक कानून बन गया तो देश में सामाजिक अस्थिरता व्याप्त हो जाएगी।

हरियाणा में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ओवैसी ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष पार्टियां चुनावों में भारतीय जनता पार्टी विरोधी मतों में सेंध लगाने के लिए उन पर आरोप लगाती थीं और उन्होंने पूछा कि हरियाणा में एआईएमआईएम के उम्मीदवारों को न उतारने के बावजूद मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व वाली पार्टी कैसे हार गई?

हरियाणा में कैसे जीत गई भाजपा?

ओवैसी ने पूछा कि भाजपा हरियाणा में कैसे जीत गई? मैं वहां नहीं था। वरना वे हमें 'बी टीम' कहते, लेकिन वे वहां हार गए। अब आप ही बताइए, वे किसके कारण हारे? ओवैसी ने कहा, ‘‘मैं पुरानी पार्टी (कांग्रेस) से कहना चाहूंगा कि मेरी बात समझिए, मोदी को हराने के लिए सबको साथ लेकर चलना होगा। आप अकेले कुछ नहीं कर पाओगे। बता दें, भाजपा ने हरियाणा में सत्ता-विरोधी लहर को मात देते हुए लगातार तीसरी बार शानदार जीत हासिल की और कांग्रेस की वापसी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हरियाणा में भाजपा ने 90 विधानसभा सीट में से 48 सीट जीतीं, जो सरकार बनाने के लिए 46 के जादुई आंकड़े से कहीं अधिक है।

वक्फ विधेयक कानून पर दी प्रतिक्रिया

इस दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि अगर वक्फ विधेयक कानून बन गया तो मस्जिदें और दरगाहें छीन ली जाएंगी। उन्होंने कहा, मैं मोदी जी से कह रहा हूं कि अगर यह वक्फ कानून बना तो देश में सामाजिक अस्थिरता पैदा हो जाएगी। हम देश को 1980 और 1990 के दशक में ले जाएंगे। हमने एक मस्जिद गंवा दी थी। अब हम कोई मस्जिद या कब्रिस्तान नहीं खोएंगे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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