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भारतीय संविधान की बात करते हुए ओवैसी ने 'भारत माता' पर दिया बड़ा बयान, जानें- क्या कहा?

ओवैसी ने कहा कि जब वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर बहस चल रही थी, तो मैंने पूरी संसद को बताया कि 24 जनवरी, 1950 को हमने खुद को एक संविधान दिया, और वह संविधान अंग्रेजी शब्दों 'वी द पीपल' से शुरू होता है। यह संविधान भारत माता के नाम से शुरू नहीं होता है।

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भारतीय संविधान की बात करते हुए ओवैसी ने 'भारत माता' पर दिया बड़ा बयान

Owaisi on Indian Constitution: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संविधान की शुरुआत अंग्रेजी शब्दों 'वी द पीपल' से होती है, न कि 'भारत माता' नाम से। रविवार को सदाशिवपेट में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, उन्होंने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर चल रही लंबी संसदीय बहस का जिक्र किया और संविधान के धर्मनिरपेक्ष और समावेशी सिद्धांतों के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि इसमें 'भारत माता' नाम का जिक्र नहीं है और इस बात पर जोर दिया कि संविधान अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावना में सभी नागरिकों के लिए स्वतंत्रता, समानता, न्याय और भाईचारे के मूल्यों को शामिल किया गया है।

'संविधान भारत माता के नाम से शुरू नहीं होता'

ओवैसी ने कहा, 'जब वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर बहस चल रही थी, तो मैं खड़ा हुआ और पूरी संसद को बताया कि 24 जनवरी, 1950 को हमने खुद को एक संविधान दिया, और वह संविधान अंग्रेजी शब्दों 'वी द पीपल' से शुरू होता है। यह संविधान भारत माता के नाम से शुरू नहीं होता है। संविधान के अनुच्छेद 25 में कहा गया है कि आपको धार्मिक स्वतंत्रता होगी। इस संविधान की प्रस्तावना स्वतंत्रता, समानता, न्याय और भाईचारे की बात करती है।'

'यह हमें मंजूर नहीं'

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देशभक्ति को सिर्फ धर्म से जोड़ना कई स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को कमजोर करता है और संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है। ओवैसी ने कहा, 'अगर आप धार्मिक पूजा को देश प्रेम से जोड़ते हैं, तो आप बहादुर शाह जफर को क्या जवाब देंगे, जिन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी और जिनके अवशेष रंगून में हैं?... आप यूसुफ मेहरअली को क्या जवाब देंगे? जिन्होंने गांधीजी से 'भारत छोड़ो' शब्दों का इस्तेमाल करने को कहा था, और जिन्होंने 'साइमन गो बैक' का नारा दिया था? अगर आप एक चीज को धर्म से जोड़ते हैं और कहते हैं कि धर्म ही देश प्रेम है, तो यह हमें मंजूर नहीं है।' बता दें कि पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान, वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर एक विस्तृत बहस हुई थी।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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