उद्धव-राज का फिर वही 'डराने' वाला दांव, मुंबई को गुजरात में मिला लेगी BJP, क्या सधेंगे मराठी वोटर?
- Written by: आलोक कुमार राव
- Updated Jan 13, 2026, 01:07 PM IST
रविवार रात शिवसेना (यूबीटी), मनसे की संयुक्त रैली में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा कि 'मुंबई को महाराष्ट्र से छीनकर उसे गुजरात को देने की साजिश हमेशा से रही है। और ऐसा करने के लिए वे पैसे का इस्तेमाल कर रहे हैं। जमीन खरीद रहे हैं। यहां लोगों को बसाकर अपने लोगों को चुन रहे हैं।
उद्धव-राज का फिर वही 'डराने' वाला दांव, मुंबई को गुजरात में मिला लेगी BJP, क्या सधेंगे मराठी वोटर?
BMC Polls 2026: बीएमसी चुनाव में स्थानीय मुद्दों का जोर तो है ही, पुराने मुद्दे भी उछाले जा रहे हैं। करीब दो दशक बाद साथ आए उद्धव एवं राज ठाकरे मराठी वोटरों को अपनी तरफ खींचने के लिए मुंबई का भावनात्मक कार्ड खेला है। दोनों भाइयों ने अपनी संयुक्त रैली में कहा कि बीएमसी चुनाव में अगर भाजपा जीती तो वह मुंबई को गुजरात का हिस्सा बना देगी। ठाकरे बंधुओं ने आरोप लगाया कि मुंबई को गुजरात का हिस्सा बनाने के लिए साजिश रची गई है। दोनों नेताओं के इस आरोप पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पलटवार किया है। बीएमसी का चुनाव 15 जनवरी को होना है।
रविवार रात शिवसेना (यूबीटी), मनसे की संयुक्त रैली में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा कि 'मुंबई को महाराष्ट्र से छीनकर उसे गुजरात को देने की साजिश हमेशा से रही है। और ऐसा करने के लिए वे पैसे का इस्तेमाल कर रहे हैं। जमीन खरीद रहे हैं। यहां लोगों को बसाकर अपने लोगों को चुन रहे हैं। जमीन हथियाना उनकी दीर्घकालिक योजना है..जमीन और भाषा हमारी पहचान है। एक बार इसके चले जाने पर आपकी पहचान खत्म हो जाएगी।'
मुंबई पर दावा करना चाहता था भाजपा नेतृत्व-उद्धव
शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने पिछले सप्ताह यही चिंता 'द इंडियन एक्सप्रेस' को दिए अपने साक्षात्कार में जाहिर की। उन्होंने कहा कि 'साल 2012 में उनके पिता बाला साहेब ठाकरे का जब निधन हुआ तो भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जो कि ज्यादातर गुजराती थी, वह मुंबई पर दावा करना चाहता था।' हालांकि, उद्धव ने कहा कि मुंबई में पीढ़ियों से रहने वाले गुजरातियों का इस तरह की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।

बीएमसी चुनाव के लिए साथ आए उद्धव एवं राज ठाकरे। तस्वीर-PTI
मुंबई को महाराष्ट्र से कोई अलग नहीं कर सकता-फडणवीस
वहीं, इन आरोपों का जवाब देते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि 'दोनों भाई गलत नरेटिव सेट कर रहे हैं। दोनों भाइयों के पास कोई मुद्दा नहीं है, वे केवल बीएमसी चुनाव के लिए एक साथ आए हैं।' सीएम ने सोमवार को कहा कि 'मुंबई में समुदाय के आधार पर कोई बंटवारा नहीं है और मुंबई का जो महत्व है, उसे कोई कम नहीं कर सकता और न ही इसे कोई महाराष्ट्र से अलग कर सकता है।' उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि 2014 और 2019 के चुनाव में जब शिवसेना का विभाजन नहीं हुआ था तो, उद्धव के नेतृत्व में गुजराी समुदाय तक पहुंच बनाने के लिए पोस्टर्स का भी सहारा लिया गया था, इस पोस्टर में लिखा था 'जलेबी फाफड़ा, ठाकरे आपड़ा' मतलब 'जलेबी एवं फाफड़ा, ठाकरे अपना'। फाफड़ा गुजरात का एक लोकप्रिय व्यंजन है।
कोर मराठी वोट बैंक में BJP ने लगाई सेंध-भाजपा अध्यक्ष
महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण का कहना है कि राज्य और मुंबई में भाजपा का जिस तरह से विस्तार हुआ है उससे ठाकरे बंधु असहज हैं। भाजपा की पैठ यूटीबी, एमएनएस के कोर मराठी वोट बैंक में हो गई है। उन्होंने कहा कि 'चाहे वह गुजराती हो, मराठी हो या उत्तर भारतीय सभी ने भाजपा को वोट दिया है।' भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक पराग अलवानी ने पूछा कि 'मुंबई में मराठी और गुजराती के बीच कोई विभाजन कहां है। शिवसेना का जब बंटवारा नहीं हुआ था और यह पार्टी तीन दशकों तक जब भाजपा के साथ थी तो ठाकरे बंधुओं ने गुजराती-मराठी का मुद्दा कभी नहीं उठाया।'

महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस। तस्वीर-PTI
'मुंबई और मराठी लोगों के लिए यह आखिरी चुनाव नहीं'
मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में महायुति की रैली को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि 'यह मुंबई और मराठी लोगों के लिए आखिरी चुनाव नहीं है; आपका अपना अस्तित्व दांव पर है।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य भाषा है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'त्रि-भाषा नीति के अंतर्गत कोई भी अपनी पसंद की भाषा को सीख सकता है, लेकिन महाराष्ट्र में मराठी एक अनिवार्य भाषा है।' फडणवीस ने विश्वास जताया कि मुंबई महानगरपालिका पर महायुति का झंडा फहराएगा। इस दौरान उन्होंने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के पुराने वीडियो भी दिखाए, जिनमें वे एक-दूसरे पर कटाक्ष करते नजर आ रहे थे।
महाराष्ट्र में पुरानी है भाषा की सियासत
सेना (यूबीटी) के नेता हर्षल प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह गुजरात से आते हैं और ये दोनों नेता उद्योगपतियों के जरिए मुंबई का दोहन करने का प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, महाराष्ट्र में भाषा और पहचान की राजनीति काफी पुरानी है। 1940 के दशक के अंत में और 1950 की शुरुआत में देश भर में भाषा के आधार पर राज्य बनाने की मांग जोर पकड़ी। मराठी बोलने वालों ने एक एकीकृत महाराष्ट्र बनाने की मांग रखी। मुंबई जो कि उस वक्त बॉम्बे के नाम से जानी जाती थी, इस मुहिम का केंद्रीय स्थल थी। माना जाता था कि बॉम्बे पर जिसका नियंत्रण होगा, उसके पास पैसे, कारोबार और राजनीतिक असर ज्यादा होगा। महाराष्ट्र और मुंबई में बोली, भाषा और पहचान की सियासत आज भी चली आ रही है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि बीएसी चुनाव में मराठी वोटरों को अपनी तरफ लामबंद करने के लिए उद्धव और राज एक बार फिर इसे भावनात्मक मुद्दे को उठा रहे हैं।
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