Amit Shah and Devendra Fadnavis Meeting: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे (Dharmendra Pradhan Resignation) के बाद देश की राजधानी दिल्ली का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों और देशभर में छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत और भावुक पत्र साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने इस कदम के पीछे की वजहों को देश के सामने रखा। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा कि पिछले चार दशकों से वे शिक्षा और छात्रों के कल्याण के लिए काम करते रहे हैं।
3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा में धांधली की खबरें सामने आने के तुरंत बाद ही सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और छात्रों के हित में नई परीक्षा आयोजित करवाई। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही इस पूरी घटना की जिम्मेदारी ली थी और कभी परिस्थितियों से मुंह नहीं मोड़ा। पत्र में उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोग लगातार छात्रों को गुमराह करने में लगे थे।
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पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से वे काफी व्यथित थे। उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर पर बनी स्थिति का कोई राष्ट्रविरोधी तत्व अनुचित फायदा न उठा सके और छात्रों का समय कानूनी पेचीदगियों में बर्बाद न हो, इसीलिए उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद दिल्ली में बैठकों और राजनीतिक गलियारों में हलचलों का दौर शुरू हो गया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अचानक दिल्ली के लिए रवाना हुए, जहां वे गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करने वाले हैं। इस अचानक हुई बैठक के बाद मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाएं गर्म हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे को केंद्र सरकार में कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। दूसरी तरफ, विपक्षी नेताओं ने इस घटनाक्रम को युवाओं और लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया है।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस को अचानक दिल्ली बुलाया गया है, जिससे लगता है कि कोई बड़ी जिम्मेदारी तय होने वाली है। राउत ने कहा कि दिल्ली से लेकर पटना, लखनऊ और कोलकाता तक युवाओं ने लाठियां खाई हैं और आज उसी संघर्ष का फल मिला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश का लोकतंत्र जो पिछले कई सालों से आईसीयू में था, उसे अब जाकर ऑक्सीजन मिली है।
