Dharmendra Pradhan Resign: लगातार 23 दिनों से देश की सड़कों और जंतर-मंतर पर गूंज रही छात्रों की आवाज आखिरकार रंग ले आई। शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। त्यागपत्र देने के साथ ही उन्होंने एक भावुक पत्र में स्वीकार किया कि देश में चल रहे इन हालात और छात्रों के आक्रोश से वे पिछले 10 दिनों से बेहद दुखी थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी हाल में युवाओं के साथ अन्याय नहीं होने देना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।
इस खबर के सामने आते ही जंतर-मंतर पर पिछले तीन हफ़्तों से डटे प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई और छात्रों ने जमकर जश्न मनाया। इस बड़े घटनाक्रम पर प्रसिद्ध पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जीत देश के उस सीधे लोकतंत्र की है जो सड़कों से निकलकर आया है। उन्होंने इसे शांति, धैर्य और युवाओं की दृढ़ता का परिणाम बताते हुए कहा कि देश की 'जेन ज़ेड' (Gen Z) और उन सभी नागरिकों को बधाई, जिन्होंने डर का त्याग करके अपनी आवाज उठाई। वांगचुक ने उम्मीद जताई कि अब देश में केवल इस्तीफे नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार देखने को मिलेंगे।
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इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते-अभिजीत दीपके
वहीं, आंदोलन की अगुवाई कर रही 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।" उन्होंने कहा कि जो लोग दावा करते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, आज युवाओं की ताकत ने उन्हें गलत साबित कर दिया है।
'आंदोलन अभी पूरी तरह खत्म नहीं'
अभिजीत दीपके ने साफ किया कि आंदोलन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार के सामने दो नई मांगें रखते हुए कहा कि परीक्षा धांधली से आहत होकर जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, उनके पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा, 20 तारीख को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
