जांच के दायरे में हैं अल-फलाह यूनिवर्सिटी। तस्वीर-PTI
Al Falah university : दिल्ली ब्लास्ट मामले में एजेंसियां जैसे-जैसे अपनी जांच आगे बढ़ा रही हैं, इस मामले में नए-नए तथ्य और चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। दिल्ली ब्लास्ट मामले में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी की संलिप्तता और उसकी फंडिंग की जांच एनआईए और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) एजेंसियां कर रही हैं। दिल्ली में बीते 10 नवंबर को लाल किले के पास आई-20 कार में हुए विस्फोट में 10 लोगों की मौत हुई और 25 अन्य लोग घायल हुए। इस कार को आतंकवादी मोहम्मद उमर चल रहा था। इस विस्फोट में उसकी भी मौत हुई। उमर अल फलाह यूनिवर्सिटी में डॉक्टर था।
सूत्रों का कहना है कि इस ब्लास्ट के बाद कानूनी एजेंसियों ने जैसे ही अल फलाह यूनिवर्सिटी को अपने रडार पर लिया। तभी से यहां काम करने वाले और पढ़ाई करने वाले लोग लापता होने लगे। लापता होने वाले स्टाफकर्मियों एवं छात्रों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। गायब हुए लोगों में तीन कश्मीर के हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इन लोगों के फोन भी स्विच ऑफ हैं। जांच एजेंसियां इन्हें ट्रैक करने में जुटी हैं। आशंका इन लोगों के 'सफेदपोश टेरर मॉड्यूल' में शामिल होने की है। एजेंसियों ने सभी गायब लोगों की सूची अल फलाह यूनिवर्सिटी से लेकर अपनी जांच आगे बढ़ा रही है।
इससे पहले ईडी ने बुधवार को अदालत को बताया कि अल फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी के पास भारत से भागने के कई ‘कारण’ हैं क्योंकि उसके परिवार के करीबी सदस्य खाड़ी देशों में बसे हुए हैं और उसने अपने ट्रस्ट द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों से ‘बेईमानी’से कम से कम 415 करोड़ रुपये की आय अर्जित की। सिद्दीकी को संघीय जांच एजेंसी ने मंगलवार रात फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय समूह के खिलाफ दिनभर की छापेमारी के बाद हिरासत में ले लिया था। यह विश्वविद्यालय 10 नवंबर को लाल किले के निकट हुए विस्फोट की जांच के केंद्र में है, जिसमें 15 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे।
सिद्दीकी को बुधवार तड़के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान (साकेत अदालत) के आवास पर पेश किया गया, जहां एजेंसी ने हिरासत में पूछताछ के लिए उसकी 14 दिन की रिमांड मांगी। अदालत ने उसे एक दिसंबर तक 13 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि सिद्दीकी के निर्देशन में विश्वविद्यालय और उसके नियंत्रक ट्रस्ट ने झूठी मान्यता और मान्यता दावों के आधार पर छात्रों और अभिभावकों को बेईमानी से धन देने के लिए प्रेरित करके 415.10 करोड़ रुपये की आपराधिक आय अर्जित की। इसने दावा किया गया कि सिद्दीकी की गिरफ्तारी आवश्यक थी क्योंकि उसके फरार होने और जांच में सहयोग न करने की आशंका थी।
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