एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की आलोचना करते हुए भारत की 'राजनीति की कार्यशैली' में बदलाव की मांग की।अंगमो ने कहा कि हालात के हिसाब से BJP और कांग्रेस समर्थकों ने उन्हें और उनके पति को अलग-अलग लेबल दिए हैं।
अंगमो ने X पर एक पोस्ट में कहा, 'जब Wangchuk को हिरासत में लिया गया था, तो BJP IT सेल ने हमें देश-विरोधी, चीनी एजेंट, विदेशी फंडिंग पाने वाला और न जाने क्या-क्या कहा था। आज, जब हमने PM आवास पर कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन को दिखावटी बताया, तो कांग्रेस के ट्रोल हमें संघी, RSS और BJP का पिट्ठू कह रहे हैं।'
उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ़ 'सरकार बदलने' से ज़्यादा कुछ चाहिए और देश की राजनीतिक संस्कृति में सुधार की मांग की। 'झंडे अलग-अलग हैं, लेकिन तरीका वही है। यह बुराई हमारी पूरी राजनीतिक संस्कृति में फैल चुकी है। भारत को सिर्फ़ सरकार बदलने की जरूरत नहीं है। उसे राजनीति के तौर-तरीकों में बदलाव की जरूरत है, जहां असहमति पर बातचीत हो, न कि बुरा-भला कहा जाए; जहां देशभक्ति को ईमानदारी से मापा जाए, न कि पार्टी से जुड़ाव से; और जहां किसी गुट के प्रति वफादारी से ज़्यादा सच मायने रखे,' आंग्मो ने आगे कहा।
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पिछले हफ़्ते एक इंटरव्यू में, आंग्मो ने 21 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर के पास कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन को 'दिखावटी' बताया था। अंगमो ने कहा, 'प्रधानमंत्री के घर के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन में ईमानदारी की कमी थी। अगर जंतर-मंतर पर एकजुट होकर यह प्रदर्शन किया जाता, तो यह ज़्यादा ईमानदार होता।' उन्होंने आगे कहा कि जनता को 'अब और बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता' और यह 'जागृत भारत' है।
वांगचुक को मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया
वहीं 27 जुलाई यानी सोमवार को सोनम वांगचुक को गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे सबसे पहले राजघाट पहुंचे। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो भी मौजूद रहीं। जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद सभी को धन्यवाद दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि बापू का दिखाया हुआ अहिंसा और शांति का मार्ग आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना सौ साल पहले था।
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महात्मा गांधी को नमन करने की थी पहली इच्छा
राजघाट पर श्रद्धांजलि देने के बाद वांगचुक ने कहा कि 26 दिन के उपवास और आंदोलन के समापन के बाद उनकी पहली इच्छा महात्मा गांधी को नमन करने की थी। उन्होंने कहा कि वह देश को यह संदेश देना चाहते हैं कि गांधीजी का रास्ता आज भी समाज और लोकतंत्र के लिए सबसे उपयुक्त है।
