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आतंकवाद से कनेक्शन के आरोपी ने जम्मू कश्मीर के कठुआ में की आत्महत्या, मामले की होगी जांच; जानें सारा विवाद

Kathua News: जम्मू कश्मीर के कठुआ में आतंकवाद में शामिल होने के आरोपी ने आत्महत्या कर ली, जिसके बाद जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस बीच बानी से विधायक रामेश्वर सिंह मृतक के परिवार के समर्थन में आए और उसके लिए न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा हैं कि मैं परिवार के साथ खड़ा हूं।

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उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री, जम्मू-कश्मीर।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Jammu-Kashmir: जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले में आतंकवाद में शामिल होने के आरोपी 26 वर्षीय एक व्यक्ति ने पुलिस द्वारा कथित तौर पर परेशान किये जाने के बाद आत्महत्या कर ली। बटोडी गांव के 26 वर्षीय निवासी माखन की मौत के बाद पुलिस और प्रशासन ने घटना की अलग-अलग जांच के आदेश दिए हैं।

वायरल वीडियो में माखन खुद को बताया निर्दोष

एक कथित वीडियो वायरल हुआ है जिसमें माखन खुद को निर्दोष बताते हुए कह रहा है कि उसका आतंकवादियों से कभी कोई संबंध नहीं रहा है। जिले के बिलावर इलाके में बुधवार रात कथित तौर पर जहर खाने से माखन की मौत हो गई। परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि माखन और उसके पिता को स्थानीय पुलिस ने उठा लिया था और आतंकवादियों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उन पर अत्याचार किया, जिसके कारण उन्हें आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सूबे के सीएम उमर अब्दुल्ला ने क्या कुछ कहा?

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि मैंने बिलावर में पुलिस हिरासत में माखन दीन पर अत्यधिक बल प्रयोग और उत्पीड़न की खबरें देखी हैं, जिसके कारण उसने आत्महत्या कर ली और वसीम अहमद मल्ला की मौत हो गई, जिसे सेना ने ऐसी परिस्थितियों में गोली मार दी जो पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। ये दोनों ही घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और ऐसा नहीं होना चाहिए था। स्थानीय लोगों के सहयोग और भागीदारी के बिना जम्मू-कश्मीर कभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाएगा और आतंक से मुक्त नहीं हो पाएगा। इस तरह की घटनाओं से उन लोगों के अलग-थलग पड़ने का खतरा है, जिन्हें हमें पूरी तरह से सामान्य स्थिति के लिए अपने साथ लेकर चलना चाहिए। मैंने इन घटनाओं को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है और आग्रह किया है कि दोनों घटनाओं की समयबद्ध, पारदर्शी तरीके से जांच की जाए। जम्मू-कश्मीर सरकार भी अपनी जांच का आदेश देगी।

माखन की मौत की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश

घटना को गंभीरता से लेते हुए कठुआ के जिला मजिस्ट्रेट ने मुरीद के बेटे माखन की मौत की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। जिलाधिकारी ने एक आदेश में कहा, "मृत्यु के कारण का पता लगाने के लिए इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच की आवश्यकता है।" बृहस्पतिवार को जारी आदेश के अनुसार, मामले की जांच के लिए लोहाई मल्हार के तहसीलदार अनिल कुमार को जांच मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है और उन्हें पांच दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के नेतृत्व में मामले की समयबद्ध जांच के भी आदेश दिए हैं। इस बीच बानी से विधायक रामेश्वर सिंह मृतक के परिवार के समर्थन में आए और उसके लिए न्याय की मांग की। सिंह ने संवाददाताओं से कहा, "जब तक परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, शव को यहां से नहीं हटाया जाएगा। मैं उनके साथ खड़ा हूं। मैं उसे जीवित नहीं कर सकता, लेकिन न्याय मिलने तक लड़ता रहूंगा।"

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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