मध्यप्रदेश के पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड कारखाने के बचा हुआ कुल 337 टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान कर दिया गया है। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार की गई, ताकि भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार इस औद्योगिक इकाई के खतरनाक अवशेषों से प्रदेश और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षा मिल सके।
घटना का इतिहास और कचरे का महत्व
भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट नामक अत्यंत जहरीली गैस का रिसाव हुआ था, जिससे हजारों लोग मारे गए और कई हजार अपंग हो गए। यह घटना विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में गिनी जाती है। हादसे के बाद इस कारखाने का भारी मात्रा में विषैला कचरा जमा हो गया, जिसे लेकर वर्षों से चिंता बनी हुई थी।
कचरे के भस्मिकरण की प्रक्रिया
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि पीथमपुर में स्थित एक निजी अपशिष्ट निपटान संयंत्र में 5 मई की शाम से शुरू हुए भस्मिकरण का कार्य 29-30 जून की दरम्यानी रात तक चला। इस दौरान यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे को 270 किलोग्राम प्रति घंटे की दर से जलाया गया। केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तकनीकी विशेषज्ञों ने इस प्रक्रिया की कड़ी निगरानी की।
पर्यावरण सुरक्षा और निगरानी
भस्मिकरण के दौरान संयंत्र से निकलने वाली गैसों और कणों की ऑनलाइन निगरानी की गई, जिसमें पार्टिकुलेट मैटर, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, हाइड्रोजन फ्लोराइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, मर्करी, कैडमियम और अन्य भारी धातुओं का उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर पाया गया। आसपास के गांवों तारपुरा, चीराखान और बजरंगपुरा में भी वायु गुणवत्ता मानकों के अनुरूप रही।
अवशेषों का सुरक्षित भंडारण और लैंडफिल योजना
कचरे के भस्मिकरण के बाद बची राख और अवशेषों को बोरों में भरकर संयंत्र के लीक-प्रूफ स्टोरेज शेड में सुरक्षित रखा जा रहा है। इन अवशेषों को दिसंबर तक वैज्ञानिक तरीके से दफनाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए विशेष लैंडफिल सेल का निर्माण कराया जा रहा है, जो नवंबर तक पूरा होने की संभावना है।
अतिरिक्त अपशिष्ट का निपटान
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कारखाने की मिट्टी से निकले लगभग 19 टन अतिरिक्त अपशिष्ट का भी भस्मिकरण पीथमपुर संयंत्र में किया जा रहा है, जो 3 जुलाई तक पूरा हो जाएगा। साथ ही पैकेजिंग सामग्री का 2.22 टन कचरा उपचार के बाद सुरक्षित तरीके से दफनाया जाएगा।
वैज्ञानिक प्रमाण और सुरक्षा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, इस कचरे में सेविन और नेफ्थाल जैसे रसायनों का प्रभाव अब लगभग समाप्त हो चुका है। साथ ही, मिथाइल आइसोसाइनेट गैस और किसी भी तरह के रेडियोधर्मी कणों का अस्तित्व नहीं है। इस प्रकार यह कार्य पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की दृष्टि से पूरी तरह सुरक्षित तरीके से किया गया।
