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'यौन उत्पीड़न के सच्चे मामले अब अपवाद हुए, पुरुषों के साथ कानून में भारी पक्षपात', इलाहाबाद HC की टिप्पणी

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Aug 3, 2023, 02:54 PM IST

Allahabad HC : जस्टिस सिद्धार्थ की एकल पीठ ने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों में कानून बुरी तरह से पुरुषों के खिलाफ है और इस तरह के मामलों की सुनवाई करते समय कोर्ट को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा, 'अब समय आ गया है कि जमानत अर्जी पर सुनवाई करते समय बेहद सावधानी बरती जाए।

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कोर्ट ने कहा-रेप के झूठे मामले अब ज्यादा आ रहे।

Photo : PTI

Allahabad HC : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि यौन उत्पीड़न के वास्तविक मामले अब अपवाद हो गए हैं और हाल के वर्षों में रेप के फर्जी मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि लंबे समय तक शारीरिक संबंध में रहने के बाद महिलाओं एवं लड़कियों द्वारा पुरुषों के खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज कराई गई हैं। इन एफआईआर का उद्देश्य पुरुषों से अनुचित लाभ पाना है।

पुरुषों के प्रति पक्षपातपूर्ण है कानून

जस्टिस सिद्धार्थ की एकल पीठ ने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों में कानून बुरी तरह से पुरुषों के खिलाफ है और इस तरह के मामलों की सुनवाई करते समय कोर्ट को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा, 'अब समय आ गया है कि जमानत अर्जी पर सुनवाई करते समय बेहद सावधानी बरती जाए। पुरुषों के प्रति कानून का रवैया काफी पक्षपातपूर्ण है। एफआईआर में आरोप लगा देना और किसी को फंसा देना बहुत आसान है। जैसा कि मौजूदा केस में हुआ है।'

'खुली संस्कृति' को बढ़ावा दे रहीं फिल्में-कोर्ट

इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया का प्रभाव, फिल्में एवं टीवी शोज समाज में 'खुली संस्कृति' को बढ़ावा दे रहे हैं और आज के लड़के और लड़कियां इन्हें अपना रहे हैं। कोर्ट ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की 'खुली संस्कृति' जब भारतीय सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों से टकराती है तो कभी-कभी झूठे केस भी दर्ज कराए जाते हैं।

कोर्ट ने यह अहम टिप्पणी रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए की। व्यक्ति पर आईपीसी एवं पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज था। आरोपी ने जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

आलोक कुमार राव
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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