जन्म के बाद बच्चे के लिए मां का दूध ही सबसे जरूरी एकमात्र आहार होता है। जिससे उसे जरूरत का संपूर्ण पोषण मिल जाता है। लेकिन कई बार मां के स्तन में दूध का निर्माण नहीं हो पाता है, जिससे उन्हें बच्चे की सेहत को लेकर काफी चिंता रहने लगती है। वहीं हमारे समाज में स्तनपान को लेकर भी कई तरह की गलतफहमियां भी चलती हैं। आजकल भले ही स्तनपान को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही हो, लेकिन कई नई मां अब भी कुछ गलत धारणाओं या भ्रमों के कारण परेशानी में पड़ जाती हैं। स्तनपान से जुड़ी कुछ आम भ्रांतियां पर हमने बात की यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिल्पा रेड्डी.वी. से।
मिथक - क्या स्तनपान कराने से मां को दर्द होता है?
स्तनपान कराने से मां को दर्द का अहसास होता है, ये भ्रांति हमारे समाज में खूब चलती है। हालांकि पहली बार बनी मां को हल्के दर्द का अनुभव हो सकता है। लेकिन ये दर्द सही पोजीशन न होने और ट्रेनिंग की कमी के कारण होता है। वहीं यदि ठीक से स्थिति का ध्यान रखा जाए तो दर्द की कोई संभावना नहीं होती है।
मिथक - क्या सिर्फ सीधे स्तन से दूध पिलाना ही फायदेमंद होता है?
यह सोचना गलत है कि बच्चा अगर सीधे स्तन से दूध नहीं पी रहा तो उसे पूरा फायदा नहीं मिलेगा। सच ये है कि अगर माँ दूध निकालकर किसी बर्तन, चम्मच या बोतल से भी बच्चे को पिलाती हैं, तो भी उसे उतना ही पोषण और रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है जितनी सीधे स्तन से दूध पीने पर मिलती है।
मिथक - क्या दूध की मात्रा जन्म के तुरंत बाद बहुत ज्यादा होनी चाहिए?
बहुत सी माताएं ये सोचती हैं कि दूध की मात्रा पहले ही दिन से बहुत ज्यादा आनी चाहिए। असल में शुरुआत में जो दूध आता है, उसे कोलोस्ट्रम कहते हैं। ये थोड़ा ही आता है लेकिन इसमें बहुत सारा पोषण होता है और नवजात शिशु के लिए सबसे जरूरी होता है। मां के शरीर में नॉर्मल दूध बनना डिलीवरी के 2–3 दिन बाद शुरू होता है। और जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, दूध की मात्रा भी बढ़ती जाती है।
