हेल्थ

दिमाग को खोखला कर देता है अल्जाइमर, 50 के बाद दिमाग को मजबूत रखने के लिए फॉलो करें ये खास टिप्स

World Alzheimer's Day 2025 : अल्जाइमर बुढ़ापे के साथ होने वाली एक गंभीर समस्या है। ये एक लाइलाज रोग है, जिसमें व्यक्ति की उम्र उसकी दिमागी सेहत के लिए मुसीबत लेकर आती है। इससे व्यक्ति की सोचने और याद करने की क्षमता कमजोर हो जाती है। आज हम एक्सपर्ट की मदद से आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे जो आपकी मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाएंगे।

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विश्व अल्जाइमर दिवस 2025

World Alzheimer's Day 2025 : कल यानी 21 सितंबर के दिन विश्व अल्जाइमर दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। आजकल बढ़ती उम्र के साथ Alzheimer’s का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। खासकर 50 वर्ष की उम्र के बाद दिमाग को स्वस्थ रखना और उसकी देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। Alzheimer’s एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो आपकी याददाश्त, सोचने की क्षमता और रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित करती है। हालांकि इसका स्थायी अभी इलाज मौजूद नहीं है, लेकिन सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इससे काफी हद तक बचाव संभव है। दिमाग की इस गंभीर समस्या से बचाव के लिए हमने बात की आकाश हेल्थकेयर में न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर और विभाग अध्यक्ष डॉ. मधुकर भारद्वाज...

डाइट का महत्व

डॉ. मधुकर भारद्वाज के मुताबिक, 50 की उम्र के बाद खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हेल्थ रिसर्च बताती है कि मेडिटेरेनियन डाइट यानी हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, दालें, नट्स और ऑलिव ऑयल Alzheimer’s के खतरे को कम कर सकते हैं। प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी और संतृप्त वसा से परहेज करना चाहिए। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर फूड (जैसे मछली, अलसी के बीज, अखरोट) दिमाग की कोशिकाओं को मजबूत बनाते हैं।

एक्सरसाइज और एक्टिव लाइफस्टाइल

दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक व्यायाम बेहद आवश्यक है।डॉक्टर की मानें तो, वॉकिंग, योग, प्राणायाम और स्ट्रेचिंग जैसे हल्के व्यायाम ब्रेन में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं। रिसर्च यह भी कहती है कि रोज 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी Alzheimer’s के खतरे को कम करती है। इसके अलावा मानसिक सक्रियता भी उतनी ही जरूरी है – जैसे किताबें पढ़ना, नई भाषा सीखना, पजल या सुडोकू सॉल्व करना। ये गतिविधियां दिमाग को लगातार सक्रिय बनाए रखती हैं।

नींद और तनाव का प्रबंधन

अच्छी नींद Alzheimer’s की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लगातार कम नींद लेने से ब्रेन टॉक्सिन्स साफ नहीं हो पाते और Alzheimer’s का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, तनाव और चिंता भी दिमाग पर नकारात्मक असर डालते हैं। मेडिटेशन और रिलैक्सेशन तकनीकें मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।

एक्सपर्ट की राय

आकाश हेल्थकेयर के न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. मधुकर भारद्वाज बताते हैं, “50 की उम्र के बाद Alzheimer’s का खतरा बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव इसे काफी हद तक टाल सकते हैं। बैलेंस्ड डाइट, रोजाना एक्सरसाइज और 7–8 घंटे की नींद दिमाग की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है।”

वे आगे कहते हैं, “अक्सर लोग सोचते हैं कि Alzheimer’s केवल जेनेटिक कारणों से होता है, जबकि अस्वस्थ जीवनशैली इसका बड़ा कारण है। अगर लोग समय रहते हेल्दी हैबिट्स अपना लें तो बुजुर्ग अवस्था में Alzheimer’s का खतरा काफी कम किया जा सकता है।” 50 से ऊपर की उम्र में दिमाग की सेहत का ध्यान रखना सिर्फ Alzheimer’s से बचाव के लिए ही नहीं बल्कि जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। सही खान-पान, एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन Alzheimer’s के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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