PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का नाम अब आधिकारिक तौर पर बदलकर PMOS कर दिया गया है। यह सुनकर कई महिलाएं कन्फ्यूज हैं कि आखिर क्या बीमारी बदल गई है या सिर्फ उसका नाम? दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने नाम से बीमारी की पूरी तस्वीर साफ नहीं होती थी। इसलिए अब इसे बेहतर तरीके से समझाने के लिए नया शब्द इस्तेमाल किया जा रहा है।
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यह समस्या आज की खराब लाइफस्टाइल, देर रात तक जागना, फास्ट फूड, कम फिजिकल एक्टिविटी और तनाव और हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी मानी जाती है। भारत में बड़ी संख्या में युवा महिलाएं इस परेशानी का सामना कर रही हैं, लेकिन कई बार शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यही वजह है कि अब डॉक्टर इस बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
PCOS क्या होता है
PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं में होने वाली एक हार्मोनल समस्या है। जिसमें पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं, वजन बढ़ने लगता है और चेहरे पर बाल या मुंहासे बढ़ सकते हैं। इस स्थिति में ओवरी ठीक से अंडे रिलीज नहीं कर पाती, जिससे प्रेग्नेंसी में भी दिक्कत आ सकती है। हालांकि इस नाम से महिलाओं की इस हार्मोनल बीमारी का मतलब साफ तरीके से नहीं समझा जा सकता है। इसलिए पीसीओएस का नाम बदलकर अब पीएमओएस कर दिया गया है।
आखिर क्या है PMOS?
PMOS का फुल फॉर्म पॉलीसिस्टिक मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम है। विशेषज्ञों के अनुसार यह सिर्फ ओवरी से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोन सिस्टम से जुड़ी स्थिति है। पहले PCOS नाम सुनते ही लोगों को लगता था कि यह केवल सिस्ट बनने की बीमारी है, जबकि हर मरीज में सिस्ट दिखाई देना जरूरी नहीं होता। इसी भ्रम को दूर करने के लिए नए नाम पर चर्चा हो रही है।
क्या होते हैं इसके लक्षण?
इस समस्या में पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, अचानक वजन बढ़ सकता है, चेहरे पर मुंहासे और अनचाहे बाल आने लगते हैं। कई महिलाओं को हेयर फॉल और थकान की शिकायत भी रहती है। कुछ मामलों में यह फर्टिलिटी यानी मां बनने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए समय रहते इसकी पहचान जरूरी मानी जाती है।
क्या इसका इलाज संभव है?
यह बीमारी पूरी तरह खत्म हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं, लेकिन सही खानपान, नियमित व्यायाम, वजन कंट्रोल और डॉक्टर की सलाह से इसे काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है।
