विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में दुनिया भर में पाए गए हर छठे बैक्टीरियल संक्रमण पर अब आम एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रहीं। 2018 से 2023 के बीच एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) में 40% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में स्थिति सबसे गंभीर है। यहां हर तीसरा संक्रमण एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधी पाया गया। अफ्रीका में यह अनुपात हर पांचवां संक्रमण है।रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अब तक 104 देशों ने WHO के ग्लास (GLASS) सिस्टम में डेटा दिया है, लेकिन लगभग आधे देश अभी भी विश्वसनीय निगरानी व्यवस्था से वंचित हैं।
डब्ल्यूएचओ ने लक्ष्य रखा है कि 2030 तक सभी देश उच्च गुणवत्ता वाले डेटा साझा करें ताकि वैश्विक स्तर पर इस खतरे को रोका जा सके।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर में आम संक्रमणों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाएं अब पहले जितनी असरदार नहीं रहीं। साल 2023 में हुई जांचों के अनुसार, हर छह में से एक संक्रमण ऐसा पाया गया जो एंटीबायोटिक से ठीक नहीं हुआ।
2018 से 2023 के बीच, एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) में 40% से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। यानी कई बैक्टीरिया अब दवाओं के खिलाफ मजबूत होते जा रहे हैं, जिससे इलाज मुश्किल हो रहा है।
सबसे ज्यादा खतरा कहां?
WHO के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया (जिसमें भारत भी शामिल है) और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में स्थिति सबसे खराब है। यहां हर तीन में से एक संक्रमण एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधी पाया गया है। अफ्रीका में भी हर पांच में से एक संक्रमण का इलाज मुश्किल हो गया है।
WHO प्रमुख डॉ. टेड्रोस अधनोम गेब्रेयसस ने कहा, “एंटीबायोटिक प्रतिरोध आधुनिक चिकित्सा के लिए खतरा बनता जा रहा है। हमें दवाओं का जिम्मेदारी से उपयोग करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी लोगों को सही दवाएं, जांच और वैक्सीन मिलें।
सबसे खतरनाक बैक्टीरिया
रिपोर्ट में बताया गया कि E. coli और Klebsiella pneumoniae जैसे ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं। ये खून में संक्रमण (Bloodstream Infection) फैलाते हैं, जिससे सेप्सिस, अंग फेल होना और मौत तक हो सकती है। E. coli के 40% से ज्यादा मामले अब आम दवाओं से ठीक नहीं होते। Klebsiella pneumoniae में यह संख्या 55% से भी ज्यादा है। अफ्रीका में तो यह प्रतिरोध 70% से ऊपर है।
यह भी पाया गया कि कई जीवनरक्षक दवाएं जैसे कार्बापेनम और फ्लोरोक्विनोलोन भी असर खो रही हैं। ये महंगी हैं और गरीब देशों में मिलना भी मुश्किल है।अच्छी बात यह है कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध की निगरानी प्रणाली में देशों की भागीदारी चार गुना बढ़ी है 2016 में जहां सिर्फ 25 देश शामिल थे, वहीं 2023 में यह संख्या 104 हो गई।हालांकि, अब भी करीब आधे देश नियमित रिपोर्ट नहीं भेजते और कई जगहों पर जांच की सुविधाएं कमजोर हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने 2024 में एक वैश्विक नीति अपनाई, जिसमें इंसानों, जानवरों और पर्यावरण के बीच “वन हेल्थ” दृष्टिकोण से काम करने की बात कही गई।WHO ने सभी देशों से अपील की है कि 2030 तक अपने सभी डेटा साझा करें, ताकि दुनिया मिलकर एंटीबायोटिक प्रतिरोध से निपट सके। WHO की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर हमने अब कदम नहीं उठाए, तो साधारण बुखार, खांसी या संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।
अब वक्त है कि हम सभी एंटीबायोटिक दवाओं का समझदारी से इस्तेमाल करें, डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें, और संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाएं।
हर 6 में से 1 संक्रमण एंटीबायोटिक से ठीक नहीं हो रहा। एशिया और अफ्रीका में हालात सबसे खराब E. coli और Klebsiella जैसे बैक्टीरिया सबसे ज्यादा खतरनाक WHO ने सभी देशों से डेटा साझा करने और निगरानी मजबूत करने की अपील की है
