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क्या प्रीडायबिटीज होने का मतलब शुगर की बीमारी का पक्का होना है - वर्ल्ड डायबिटीज डे पर जानें फैक्ट्स

World Diabetes Day 2025: हर साल 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है, ताकि दुनिया भर में बढ़ते डायबिटीज मामलों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सके। इस मौके हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या है प्री-डायबिटीज? यानी ऐसी स्थिति जब शरीर आपको पहले ही चेतावनी दे देता है कि आगे खतरा है। आइए जानते हैं प्री-डायबिटीज के संकेत और बचाव के उपाय…

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क्या है प्रीडायबिटीज और कितना है खतरनाक

World Diabetes Day 2025: डायबिटीज लाइफस्टाइल से जुड़ा एक गंभीर रोग है जिसका असर धीरे-धीरे हमारे पूरे शरीर पर दिखाई देता है। इस रोग की गंभीरता को देखते हुए हर साल 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है, ताकि दुनिया भर में बढ़ते डायबिटीज मामलों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सके। आज हम आपको प्री-डायबिटीज के बारे में बताने जा रहे हैं। इस मौके पर सबसे जरूरी बात जो समझनी चाहिए, वह है — प्री-डायबिटीज, यानी वह स्थिति जब शरीर आपको पहले ही चेतावनी दे देता है कि आगे खतरा है। अक्सर लोग मान लेते हैं कि प्रीडायबिटीज का अर्थ है कि उनको शुगर की बीमारी हो ही गई है। वहीं कुछ लोग इस पर भी लापरवाही बरतते हैं। आइए जानते हैं क्या है प्री-डायबिटीज इसके लक्षण और बचाव के उपाय...

आप सुबह बिस्तर से उठे और आपको अजीब सी थकान फील हो, काम करते हुए बार-बार प्यास का लगे, कई बार पेशाब जाना और अचानक से चक्कर आना, ये सभी सामान्य लक्षण नहीं है। यदि आप इन्हें केवल मौसम का बदलाव या सेहत का कोई सामान्य संकेत समझ कर इग्नोर कर रहे हैं, तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। जी हां, ये सभी संकेत प्री-डायबिटीज कंडीशन के हो सकते हैं। यदि आप डायबिटीज और प्री-डायबिटीज में अंतर नहीं जानते हैं, तो आपको बता दें कि डायबिटीज रोग की शुरुआत होने से पहले वाली कंडीशन को ही प्री-डायबिटीज कहा जाता है। आज हम आपको एक्सपर्ट की सहायता से बताएंगे प्री-डायबिटीज के संकेत और बचाव के उपाय...

क्या है प्री-डायबिटीज? - What Is Pre-Diabetes In Hindi

प्री-डायबिटीज का मतलब है — आपका ब्लड शुगर लेवल सामान्य से ज्यादा है, लेकिन अभी इतना नहीं बढ़ा है कि इसे डायबिटीज कहा जाए। यानी यह डायबिटीज की चेतावनी घंटी है। इसलिए अभी से आपको सावधान हो जाना चाहिए। प्री-डायबिटीज को ब्लड शुगर के तीन मानकों से पहचाना जा सकता है।

  • फास्टिंग ब्लड शुगर: 100–125 mg/dl
  • पोस्ट मील ब्लड शुगर (भोजन के 2 घंटे बाद): 140–199 mg/dl
  • HbA1c (तीन महीने का औसत शुगर लेवल): 5.7% से 6.4% के बीच

अगर आपकी रिपोर्ट इन सीमाओं में आती है, तो यह संकेत है कि डायबिटीज का खतरा दरवाजे पर हैं। जुपिटर हॉस्पिटल पुणे की एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. स्वाति तायल गोरे कहती हैं कि प्री-डायबिटीज कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। इस समय अगर हम अपनी आदतें बदल लें, तो 70% तक लोग डायबिटीज की शुरुआत को टाल सकते हैं।

ब्लड रिपोर्ट क्या कहती है? (नॉर्मल रेंज जानें)

डॉक्टर ब्लड शुगर जांच के लिए तीन मुख्य टेस्ट करवाते हैं:

टेस्ट का नामनॉर्मल रेंजप्री-डायबिटीज रेंजडायबिटीज रेंज
Fasting Sugar (खाली पेट)70–99 mg/dL100–125 mg/dL126 mg/dL या अधिक
Post Meal (2 घंटे बाद)< 140 mg/dL140–199 mg/dL≥ 200 mg/dL
HbA1C(3 महीने का औसत)< 5.7%5.7% –6.4%≥ 6.5%

प्री-डायबिटीज के लक्षण - Symptoms Of Pre-diabetes In Hindi

प्री-डायबिटीज में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन डॉ. स्वाति के अनुसार कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जिसमें,

  1. बार-बार प्यास लगना या पेशाब आना
  2. लगातार थकान या कमजोरी
  3. पेट के आसपास चर्बी बढ़ना
  4. परिवार में डायबिटीज का इतिहास
  5. देर रात तक जागना या नींद की कमी
  6. घाव का देर से भरना
  7. त्वचा का काला पड़ना, खासकर गर्दन और बगल में
  8. ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई

कैसे करें प्री-डायबिटीज से बचाव?

जीवनशैली में बदलाव है सबसे बड़ी दवा है। इससे प्री-डायबिटीज को रिवर्स तक किया जा सकता है, यानी अगर आप समय रहते अपनी दिनचर्या सुधारें तो ब्लड शुगर सामान्य हो सकता है। आकाश हेल्थकेयर की वरिष्ठ सलाहकार, एंडोक्राइनोलॉजी, डॉ. मोनिका शर्मा कहती हैं कि, रोज 30 मिनट तेज चलना, शुगर इंटेक कम करना, फाइबर युक्त भोजन लेना और वजन कंट्रोल में रखना ये चार कदम डायबिटीज की रोकथाम की कुंजी है।

कई हेल्थ रिसर्च में पता चला है कि 5 से 7 किलो वजन कम करने से डायबिटीज का खतरा लगभग 58% तक घट जाता है। इसलिए अपने वजन को कंट्रोल में रखें। जिसके लिए आप रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लें।

नियमित जांच और मॉनिटरिंग प्रोग्राम

डॉ. मोनिका शर्मा की मानें तो जो लोग हाई रिस्क ग्रुप में आते हैं — जैसे 35 वर्ष से अधिक उम्र, परिवार में डायबिटीज का इतिहास, या मोटापा — उन्हें हर छह महीने में ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए। अब कई अस्पताल और हेल्थ स्टार्टअप 'प्री-डायबिटीज रिवर्सल प्रोग्राम' चला रहे हैं, जिनमें डाइट, योग, फिटनेस और मॉनिटरिंग का पूरा प्लान शामिल होता है। डिजिटल हेल्थ मॉनिटरिंग, मोबाइल ऐप्स और वियरेबल डिवाइसेज की मदद से अब हम अपने शुगर लेवल को रियल टाइम में देख सकते हैं। यह जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

निष्कर्ष

प्री-डायबिटीज कोई डराने वाली बीमारी नहीं, बल्कि सेहत के लिए एक चेतावनी संकेत है। अगर आप इसे समय रहते पहचान लें, तो आप न सिर्फ डायबिटीज बल्कि उससे जुड़ी हर जटिल बीमारी — जैसे हार्ट डिजीज, किडनी प्रॉब्लम, और स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरों से भी बच सकते हैं। याद रखें - थोड़ी सी समझदारी, रोज की सावधानी, और स्वस्थ दिनचर्या — यही है प्री-डायबिटीज से आजादी की कुंजी है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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